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आर्यिका माताजी हादसे पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन,संत सुरक्षा कानून और SIT जांच की मांग

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आर्यिका माताजी हादसे पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन,संत सुरक्षा कानून और SIT जांच की मांग

गोमिया (बोकारो) | संवाददाता राजस्थान के कोटा में विहाररत जैन साध्वी (आर्यिका माताजी) के साथ हुए सड़क हादसे को लेकर गोमिया अनुमंडल क्षेत्र में जैन समाज का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। सकल दिगंबर जैन समाज के बैनर तले गोमिया, साड़म, पेटरवार, ललपनिया और जैनामोड़ क्षेत्र के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण…

आर्यिका माताजी हादसे पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन,संत सुरक्षा कानून और SIT जांच की मांग
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गोमिया (बोकारो) | संवाददाता

राजस्थान के कोटा में विहाररत जैन साध्वी (आर्यिका माताजी) के साथ हुए सड़क हादसे को लेकर गोमिया अनुमंडल क्षेत्र में जैन समाज का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। सकल दिगंबर जैन समाज के बैनर तले गोमिया, साड़म, पेटरवार, ललपनिया और जैनामोड़ क्षेत्र के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण मौन प्रदर्शन किया।

समाज के लोगों ने संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून बनाने, “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई।

मौन जुलूस के जरिए जताया विरोध

आर्यिका माताजी हादसे पर जैन समाज का मौन प्रदर्शन,संत सुरक्षा कानून और SIT जांच की मांग

प्रदर्शन के दौरान महिला, पुरुष और युवा सदस्य हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर निकले।

मौन जुलूस के माध्यम से समाज ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने संतों की सुरक्षा को एक राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के उपरांत जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में संजय जैन, मनोज जैन, शैलेश जैन, विकास जैन, पंकज जैन और रूचि जैन सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे।

ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं:

  • संतों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाए
  • विहार मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए
  • पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

संतों की सुरक्षा को बताया अहम मुद्दा

जैन समाज के लोगों ने कहा कि जैन संत और आर्यिकाएं पूर्णतः अहिंसक और निहत्थे होते हैं, जो पैदल विहार करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की बनती है।

उन्होंने कहा कि लगातार हो रही घटनाएं यह दर्शाती हैं कि संतों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी नीति की आवश्यकता है।

वीडियो और तथ्यों से उठे सवाल

समाज के प्रतिनिधि संजय जैन ने कहा कि 22 मई को हुई यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं लगती।

उनका कहना है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य तथ्यों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब मिलना आवश्यक है।

उन्होंने इस मामले में सत्य उजागर करने के लिए SIT (विशेष जांच दल) या न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही सभी CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी प्रमाणों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया।

“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग

ज्ञापन में जैन समाज ने “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

इस प्रोटोकॉल के तहत निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बात कही गई:

  • विहार मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण
  • चेतावनी संकेतक (Warning Sign Boards)
  • पुलिस और प्रशासन का समन्वय
  • सुरक्षा व्यवस्था की विशेष निगरानी

इसके अलावा भारत सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” लागू करने की भी मांग की गई, ताकि देशभर में विहाररत संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


असली चालक को बचाने का आरोप

प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद वास्तविक चालक फरार हो गया, जबकि किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया है।

जैन समाज ने इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए।


“तनाव नहीं, सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”

समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का सामाजिक तनाव उत्पन्न करना नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


गोमिया अनुमंडल में हुआ यह मौन प्रदर्शन जैन समाज की भावनाओं और उनकी गंभीर चिंताओं को दर्शाता है। संतों की सुरक्षा को लेकर उठी यह आवाज अब एक व्यापक मुद्दा बनती जा रही है।

यदि सरकार और प्रशासन समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो न केवल संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सामाजिक विश्वास और सौहार्द भी मजबूत होगा।

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