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कोटालपोखर में पत्थर क्रेशरों से उड़ता धूलकण,ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल

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कोटालपोखर में पत्थर क्रेशरों से उड़ता धूलकण,ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल

कोटालपोखर (साहिबगंज): केशव तिवारी की रिपोर्ट,साहिबगंज जिले के कोटालपोखर थाना क्षेत्र में संचालित करीब एक दर्जन पत्थर क्रेशर प्रदूषण संबंधी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। डाटापाड़ा और बासुटोला गांव में स्थापित क्रेशर दिन-रात चलने से आसपास के फुलचुआ, बासुटोला, डाटापाड़ा, पथरिया सहित कई गांवों के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों…

कोटालपोखर में पत्थर क्रेशरों से उड़ता धूलकण,ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल
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कोटालपोखर में पत्थर क्रेशरों से उड़ता धूलकण,ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल

कोटालपोखर (साहिबगंज): केशव तिवारी की रिपोर्ट,
साहिबगंज जिले के कोटालपोखर थाना क्षेत्र में संचालित करीब एक दर्जन पत्थर क्रेशर प्रदूषण संबंधी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। डाटापाड़ा और बासुटोला गांव में स्थापित क्रेशर दिन-रात चलने से आसपास के फुलचुआ, बासुटोला, डाटापाड़ा, पथरिया सहित कई गांवों के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर से उड़ने वाले धूलकणों के कारण घरों में मोटी धूल की परत जम जाती है। बिस्तर से लेकर घर के अन्य सामान तक धूल से भर जाते हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो क्षेत्र के अधिकांश लोग सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

स्कूल के बच्चों पर भी असर


प्राथमिक मध्य विद्यालय चौरा के प्रधानाचार्य ने बताया कि चौरा मोड़ से महज एक मीटर दूरी पर स्थित विद्यालय में छोटे-छोटे बच्चों की स्थिति दयनीय हो गई है। क्रेशर चलने की आवाज और उड़ते धूलकणों के कारण बच्चों की किताबों पर धूल की मोटी परत जम जाती है। इस समस्या को लेकर छह महीने पहले संबंधित विभाग में शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नतीजतन बच्चे और शिक्षक दोनों धूलकणों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी


इस संबंध में जब जिला खनन पदाधिकारी, साहिबगंज से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में अब तक नहीं आया था। उन्होंने बताया कि प्रदूषण विभाग को सूचना देकर जांच कराई जाएगी और दोषी क्रेशर मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या है नियम


नियमों के अनुसार पत्थर क्रेशर प्लांट में धूलकण को रोकने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाना अनिवार्य है। लेकिन क्षेत्र के अधिकांश क्रेशर प्लांट में पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। नतीजतन क्रेशर चलते ही पूरे इलाके में धूलकण उड़ने लगते हैं और वातावरण धुंध जैसा हो जाता है।

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