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भोगनाडीह से आरंभ हुई “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” — 12 नवंबर को पहुंचेगी उलिहातु

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भोगनाडीह से आरंभ हुई “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” — 12 नवंबर को पहुंचेगी उलिहातु

बरहरवा:- झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क और राज्य की अनेक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की ओर से बुधवार को भोगनाडीह में “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” की भव्य शुरुआत हुई। यह यात्रा सिदो-कान्हु, चांद-भैरव, फूलो-झानो जैसे महान जननायकों को नमन करते हुए, झारखंड में हरित और समावेशी विकास की दिशा में सामुदायिक संवाद और समाधान की पहल है।…

भोगनाडीह से आरंभ हुई “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” — 12 नवंबर को पहुंचेगी उलिहातु
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भोगनाडीह से आरंभ हुई “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” — 12 नवंबर को पहुंचेगी उलिहातु

बरहरवा:- झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क और राज्य की अनेक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की ओर से बुधवार को भोगनाडीह में “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” की भव्य शुरुआत हुई। यह यात्रा सिदो-कान्हु, चांद-भैरव, फूलो-झानो जैसे महान जननायकों को नमन करते हुए, झारखंड में हरित और समावेशी विकास की दिशा में सामुदायिक संवाद और समाधान की पहल है।

यात्रा की शुरुआत भोगनाडीह के सिदो-कान्हु पार्क में सिदो-कान्हु, चांद, भैरव, फूलो और झानो की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर सिदो-कान्हु की सातवीं पीढ़ी के वंशज मनोज मुर्मू को झारखंडी गमछा, कैप, बैज और टी-शर्ट पहनाकर सम्मानित किया गया।

इससे पूर्व, सभी यात्री अरुप्पे आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र से “अबुआ भागीदारी – अबुआ भविष्य”, “सिदो-कान्हु अमर रहें”, “चांद-भैरव अमर रहें” जैसे नारे लगाते हुए पदयात्रा करते हुए पार्क पहुंचे। वहां नुक्कड़ नाटक मंडली ने सिदो-कान्हु के घर के सामने नाटक प्रस्तुत कर ग्रामीणों को “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” के उद्देश्य से अवगत कराया और आदिवासी समाज की संस्कृति व परंपराओं को दर्शाने वाले गीत प्रस्तुत किए।

भोगनाडीह से आरंभ हुई “जस्ट ट्रांजिशन यात्रा” — 12 नवंबर को पहुंचेगी उलिहातु

संवाद संस्था के प्रतिनिधि घनश्याम जी ने कहा, “यह यात्रा ऊर्जा के हरित विकल्पों की तलाश और समावेशी प्रतिनिधित्व की समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। यह समुदायों के साथ मिलकर जलवायु न्याय और सतत भविष्य की दिशा में संवाद की एक पहल है।”यात्रा में शामिल हुए यात्रियों ने पेड़ों का महत्व दर्शाने के लिए अरुप्पे आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र में 50 पौधे भी रोपे गए।बता दें कि यह यात्रा 5 नवंबर को भोगनाडीह से शुरू होकर 13 जिलों से गुजरते हुए 12 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु में संपन्न होगी।

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