“तीन आम दवाइयां जो शरीर में सोडियम की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिरा सकती हैं : न्यूरोलॉजिस्ट का खुलासा”

“तीन आम दवाइयां जो शरीर में सोडियम की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिरा सकती हैं : न्यूरोलॉजिस्ट का खुलासा”
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“तीन आम दवाइयां जो शरीर में सोडियम की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिरा सकती हैं : न्यूरोलॉजिस्ट का खुलासा”

देश के प्रमुख चिकित्सा समूह Apollo Hospitals (हैदराबाद) के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने चेतावनी दी है कि कुछ सामान्यतः प्रयोग की जाने वाली दवाइयां शरीर में सोडियम (नमक) के स्तर को बेहद कम कर सकती हैं, जिससे एक गंभीर स्थिति — हाइपोनैट्रेमिया — उत्पन्न हो सकती है।

इस स्थिति में रक्त में सोडियम की मात्रा सामान्य से नीचे चली जाती है, जिससे कोशिकाओं के आसपास तरल का असंतुलन बनता है। इसके शुरुआती लक्षण थकान, चक्कर आना, ध्यान केंद्रित न कर पाना हो सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो दौरे (सेज़र्स) या कोमा जैसे खतरनाक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

जोखिम वाली दवाइयाँ

डॉ. कुमार ने तीन प्रमुख दवाओं की श्रेणियाँ नामित की हैं, जो इस समस्या के पीछे हो सकती हैं:

  1. थायाजाइड डाइयूरिटिक्स (Thiazide Diuretics) – जैसे कि हाई-ब्लड प्रेशर या पानी की समस्या में दिए जाने वाले डाइयूरिटिक्स, जो शरीर से पानी और नमक को बाहर निकालने में मदद करते हैं, लेकिन कभी-कभी सोडियम को बहुत कम कर देते हैं।
  2. सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (SSRIs) – अवसाद, चिंता जैसी स्थितियों में प्रयुक्त मानसिक स्वास्थ्य दवाइयाँ, जो शरीर में पानी के संचय को बढ़ा सकती हैं और नतीजतन सोडियम पतला कर सकती हैं।
  3. एंटी-सेज़र और मूड-स्टेबिलाइजिंग दवाइयाँ – जैसे कि कार्बामाज़ेपिन (Carbamazepine) और ऑक्सकार्बाज़ेपिन (Oxcarbazepine), जिन्हें मिर्गी या मूड डिसऑर्डर में प्रयोग किया जाता है, ये दवाइयां SIADH (अनियुक्त एंटीडाययूरेटिक हार्मोन सिंड्रोम) को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे अधिक पानी शरीर में जमा हो जाता है और सोडियम का स्तर गिर जाता है।

कौन-कौन जोखिम में हैं?

डॉ. कुमार के अनुसार, विशेष रूप से निम्नलिखित समूहों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए:

  • बुजुर्ग मरीज, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में जल-सोडियम संतुलन बिगड़ने का जोखिम बढ़ता है।
  • जिन लोगों को एक से अधिक दवाइयाँ चल रही हैं (पॉली-मेडिकेशन)।
  • गुर्दा या हृदय संबंधी समस्या वाले व्यक्ति, जिनमें शरीर के वाटर होमियोस्टेसिस पर पहले से दबाव है।
  • उन रोगियों में जिनमें हाल-ही में अचानक थकान, घबराहट, चक्कर आना या मूड में बदलाव आया हो।

लक्षण व सावधानियाँ

डॉ. कुमार ने मरीजों और चिकित्सा पेशेवरों को ध्यान देने योग्य लक्षणों पर संकेत दिए हैं:

  • थकान, चक्कर आना, ध्यान केंद्रित न हो पाना या हल्की भूल-भुलैय्या।
  • मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन, जैसे लगे कि शरीर ठीक से काम नहीं कर रहा।
  • उल्टी-गल्टी, अगर तरल संचय बहुत बढ़ गया हो।
  • गंभीर स्थिति में सेज़र्स या कोमा तक की संभावना।

क्या करना है?

  • यदि आप इन दवाइयों में से कोई ले रहे हों, तो नियमित रूप से सोडियम स्तर (सिरम सोडियम) और गुर्दे-लिवर कार्य की जांच करवाएं।
  • किसी भी असामान्य लक्षण (जैसे अचानक थक जाना, चक्कर आना) पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
  • किसी दवा को स्वयं बंद या बदलने का निर्णय न लें — यह चिकित्सकीय सलाह से ही होना चाहिए।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिये, लेकिन अत्यधिक पानी पीना और बिना इलेक्ट्रोलाइट्स के पानी पीना भी खतरनाक हो सकता है।
  • यदि डॉक्टर को बताया गया हो कि आपको हाइपोनैट्रेमिया का जोखिम है, तो वो उचित दवा-मात्रा-परिवर्तन व निरीक्षण करेंगे।

स्रोत:जागरण

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