बरहरवा संवाददाता।
बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र के कालीतल्ला ग्राम स्थित बड़ी काली मंदिर, कालीतल्ला बंगालीपाड़ा में रविवार की मध्य रात्रि हरियाली अमावस्या के अवसर पर भव्य पूजा-अर्चना धूमधाम से संपन्न हुई।
मंदिर के मुख्य पुरोहित तरुण बाबा महाराज ने तांत्रिक विधि-विधान के साथ मां काली की पूजा की। मध्यरात्रि में हवन, बलि एवं पूर्णाहुति के साथ पूजा सम्पन्न की गई।
इस अवसर पर पुरोहित ने बताया कि हरियाली अमावस्या धर्म, प्रकृति और पितरों से जुड़ा विशेष दिन है। इस दिन मां काली के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मान्यता है कि पति-पत्नी एक साथ पूजा करें तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अमावस्या को पितृ देवों का दिन माना जाता है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, जिसे नान्दीमुख श्राद्ध भी कहा जाता है।
प्रकृति और पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण के लिए इसे शुभ दिन माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि वृक्ष लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है।
पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और आंवला जैसे वृक्षों में देवताओं का वास माना जाता है। इनकी पूजा कर प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी इस दिन गोवर्धन पर्वत की तलहटी में वृक्षारोपण किया था।
इस प्रकार हरियाली अमावस्या न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता है।