गोमिया: लुगु पहाड़ के जंगल को रातों-रात काटकर अवैध कारोबार करने वाले माफिया पर वन विभाग ने तड़के बड़ा प्रहार किया। प्रभारी डीएफओ नीतीश कुमार के नेतृत्व में शनिवार सुबह 6 बजे गोमिया प्रखंड के भोलाडीह और तुलबुल गांव में एक साथ छापेमारी कर अवैध लकड़ी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। गुप्त सूचना पर हुई इस कार्रवाई को विभाग की अब तक की सबसे बड़ी रेड बताया जा रहा है।
प्रशिक्षु डीएफओ संदीप कुमार शिंदे और गोमिया रेंजर बटेश्वर पासवान के साथ 30 सदस्यीय टीम ने दोनों गांवों की घेराबंदी की। टीम में वनपाल, वनरक्षी, सैप के सशस्त्र जवान और स्थानीय पुलिस शामिल थे। पहले से चिन्हित कई घरों की बाड़ी, छप्पर और घर के अंदर साल, सखुआ और केन्द की ताजा कटी लकड़ी का जखीरा बरामद हुआ। कई घरों में बिना लाइसेंस चल रही छोटी-बड़ी इलेक्ट्रिक और बेल्ट वाली आरा मशीनें भी मिलीं।
विरोध की आशंका पर पहले से 2 जेसीबी मंगाई गई थीं। मशीनों की नींव उखाड़कर उन्हें जब्त कर सील किया गया। जब्त सभी लकड़ी और मशीनों को 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर गोमिया वन परिसर कार्यालय लाया गया। जब्त लकड़ी की बाजार कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।
प्रभारी डीएफओ नीतीश कुमार ने बताया कि पिछले एक महीने से सूचना मिल रही थी कि लुगु पहाड़ के जंगल से रात में पेड़ काटकर भोलाडीह-तुलबुल में डंप किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई में 6 लोगों को चिन्हित किया गया है। इनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33, 52 और 63 के तहत केस दर्ज किया जा रहा है।
उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अब अवैध कटाई और आरा मशीनों पर पूरी रोक लगेगी। हर 15 दिन में औचक छापे मारे जाएंगे और ड्रोन से भी जंगल की निगरानी शुरू की जाएगी। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखकर इनाम दिया जाएगा।
अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई से दोनों गांवों में हड़कंप मच गया। रेड की भनक लगते ही कई आरोपी घरों में ताला लगाकर जंगल की ओर फरार हो गए। प्रशिक्षु डीएफओ संदीप कुमार शिंदे ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। जंगल माफिया का पूरा नेटवर्क तोड़ा जाएगा और लकड़ी खरीदने वाले व्यापारियों पर भी कार्रवाई होगी।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुज्ञप्ति आरा मशीन चलाना और जंगल की लकड़ी का भंडारण, परिवहन या व्यापार करना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।