प्रेम कुमार साहू की रिपोर्ट,
घाघरा। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के प्रति जागरूक करना, नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व को बताना तथा अभियान की उपलब्धियों को साझा करना था। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों, एएनएम, सहिया कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ हुई। उपस्थित चिकित्सकों ने महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की तथा उन्हें गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, आयरन एवं कैल्शियम की दवाओं का सेवन करने तथा संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।
चिकित्सकों ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाती है। इस अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उनका उचित उपचार सुनिश्चित करना है। अभियान के माध्यम से अब तक लाखों महिलाओं को लाभ मिला है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिकित्सा प्रभारी डॉ. अरविंद कुशल एक्का ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराने से संभावित जटिलताओं का समय रहते पता चल जाता है, जिससे मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाने और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की अपील की।
वहीं डॉ. फरजाना ने महिलाओं को नवजात शिशु की देखभाल, स्तनपान के महत्व तथा प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य की देखरेख के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का पहला दूध पिलाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। साथ ही उन्होंने महिलाओं को साफ-सफाई और पोषण संबंधी आवश्यक बातों पर भी जागरूक किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में इस अभियान ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में यह अभियान एक प्रभावी पहल साबित हुआ है। इसके माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जटिलताओं और मृत्यु के मामलों में कमी आई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच अवश्य करानी चाहिए। साथ ही टीकाकरण, पोषण और नियमित चिकित्सकीय परामर्श को अपनाकर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद एएनएम और सहिया कार्यकर्ताओं ने भी महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की जानकारी दी तथा उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। उन्होंने गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, संस्थागत प्रसव और पोषण संबंधी जानकारी देने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही गर्भवती महिलाओं से चिकित्सकीय सलाह का पालन करने तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की गई।
इस अवसर पर चिकित्सा प्रभारी डॉ. अरविंद कुशल एक्का, डॉ. फरजाना, बीटीटी सीमा देवी, बबीता देवी सहित कई स्वास्थ्य सहिया एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने भाग लेकर सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।