दीपक कुमार , जमशेदपुर
जमशेदपुर :- लौहनगरी जमशेदपुर में सांडों के आतंक से सब परेशान है । जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग आधा दर्जन लोगों को इन आवारा सांडों ने मौत के घाट उतार दिए हैं। फिर भी इन आवारा सांडों से निपटने के लिए कोई ठोस कदम अबतक नहीं उठाया गया है। जानकारों की माने तो इन आवारा सांडों पर नकेल कसना वक्त की मांग है। आदित्यपुर मुख्य मार्ग से लेकर, साकची , बिष्टुपुर, कदमा , सोनारी , गोलमुरी , बारीडीह , टेल्को , बिरसानगर समेत पंचायत क्षेत्रों में लोग सांडो के आतंक से परेशान है। शहर के चौक – चौराहों पर आए दिन सांडों का डेरा देखा जा सकता है। बताते चलें कि खतरनाक स्थिति तो तब हो जाती है जब साकची बाजार में खूंखार सांड घूस कर आतंक मचाता है और संबंधित विभाग तमाशबीन बना रहता है। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि विगत एक वर्ष पूर्व एक सनकी सांड ने दो लोगों को बेरहमी से पटक कर मार डाला था। अशोक अग्रवाल एवं राज किशोर सिंह की सनकी सांड ने जान ले ली थी। वहीं टेल्को नेपाल बिल्डिंग क्षेत्र में एक सांड ने एसके लाल नामक एक कर्मचारी को पटकर मार डाला था। साकची बाजार में ही एक नुक्कड़ सभा के दौरान एक सांड ने कईयों को घायल किया था। अभी 8 मई को बर्मामाइंस में निशांत नामक एक युवक को सांड ने बुरी तरह घायल कर दिया। सांड के हमले में युवक का जांघ चिरा गया है। टीएमएच में वो इलाजरत है। सांड के हमले के बाद हर बार यह मामला उठता है कि इन आवारा मवेशियों से जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। परंतु वक्त के साथ मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। सांड के हमले से दर्जनों लोग घायल हुए हैं वहीं दर्जनों वाहनों की क्षति हुई है। आए दिन समानों की क्षति भी करते रहे हैं ये आवारा मवेशी।
सनकी सांडों पर भी लोगों का फूटा है गुस्सा ।
कई बार सांडों के आतंक से गुस्साए लोगों ने सांडों को भी मार कर घायल किया है। एक बार सांड को किसी ने तीर मारकर घायल कर दिया था। वहीं वाहनों से ठोकर मारकर भी सांडों को घायल करने की घटनाएं घटित हुई है। वहीं कई बार घायल आवारा मवेशियों को इसी शहर में इलाज भी किया गया है। बहरहाल खुले में विचरण करने वालें खूंखार आवारा मवेशियों से लोगों को सुरक्षित करने के लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ( जेएनएसी ) , मानगो व जुगसलाई नगर निगम समेत कंपनियों के टाउन डिपार्टमेंट व सुरक्षा विभाग को त्वरित संज्ञान लेते हुए इस ओर ध्यान देना चाहिए।
कटक जैसी कार्रवाई की इच्छा रखते हैं लोग।
पड़ोसी राज्य ओड़ीसा में सड़कों पर आवारा घूमने वालें मवेशियों को सीएमसी ( कटक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ) के कर्मी वाहनों में लादकर ले जाते हैं। उधर बताया जाता है कि जमशेदपुर में पशु पालक बछड़ों को खुला छोड़ देते हैं जो आगे चलकर बड़ा होकर खूंखार सांड बनकर आतंक मचाता है। वहीं कई बार दो सांड आपस में लड़ जाते हैं भीड़ – भीड़ वाले क्षेत्रों में ऐसा होने से दर्जनों लोग घायल हुए हैं। लोगों ने कहा कि शहर में आवारा मवेशियों की गणना होनी चाहिए। तथा उस पर निशान लगाया जाना चाहिए ताकि आवारा मवेशियों की संख्या में इजाफा होने पर उसपर अंकुश लगाया जा सके।
हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए जारी।
आवारा मवेशियों की धर पकड़ एवं उसके आतंक से सुरक्षा प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाना चाहिए ताकि लोग शिकायत दर्ज करा सके।