बरहरवा/साहिबगंज:
साहिबगंज के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण व पशु प्रेमी सैयद अरशद नसर ने शुक्रवार को साहिबगंज जेल प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई उच्च अधिकारियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
अरशद ने अपने पत्र में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ (अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण), न्यायाधीश संजीव पांडेय (सचिव, नालसा), न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन (अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग), हेमंत सोरेन (मुख्यमंत्री, झारखंड), अमिताभ कुमार गुप्ता (लोकायुक्त), तदाशा मिश्रा (डीजीपी, झारखंड), वंदना दादेल (अपर मुख्य सचिव, गृह व कारा विभाग), पटेल मयुर कन्हैयालाल (आईजी, दुमका) एवं अंबर लकड़ा (डीआईजी, दुमका) सहित अन्य अधिकारियों को संबोधित किया है।
पत्र में अरशद ने आरोप लगाया है कि 15 मई को साहिबगंज जेल गेट पर उनके साथ कारा कर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार और बदसलूकी की गई। साथ ही उन्होंने उस दिन के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया के दौरान इसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
अरशद ने यह भी आरोप लगाया कि 13 दिसंबर को साहिबगंज जेल से मधुपुर जेल स्थानांतरण के दौरान उनका जमा नगद राशि, मुलाकाती सामान, मेडिकल रिपोर्ट और बंदी आवेदन पत्र वापस नहीं किया गया। उन्होंने संबंधित सामान तत्काल लौटाने की मांग की है।
इससे पहले भी 23 मई को अरशद ने झालसा, डालसा, मुख्य सचिव, गृह सचिव, जेल आईजी, डीसी और एसपी को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
अरशद ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि साहिबगंज और मधुपुर जेल में 14 महीने की न्यायिक हिरासत के दौरान उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने दोषी कारा अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उनका सामान वापस नहीं मिलता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस मामले को लेकर जहां जेल प्रशासन में हलचल मच गई है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और बंदियों के बीच इस पहल को लेकर संतोष और समर्थन देखने को मिल रहा है।