डूमरी बिहार/ललपनिया। प्रशांत सिन्हा,
टीटीपीएस ललपनिया विस्थापित संघर्ष समिति सम्मेलन के तहत विस्थापित संघर्ष समिति, टीटीपीएस–ललपनिया का तीसरा सम्मेलन डूमरी बिहार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में क्षेत्र के सैकड़ों विस्थापितों ने भाग लिया और अपने अधिकारों को लेकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत झंडोत्तोलन के साथ हुई, जिसके बाद संगठन को मजबूत करने और लंबित मांगों को लेकर व्यापक चर्चा की गई।
सम्मेलन की अध्यक्षता विस्थापित नेता भीम महतो ने की, जबकि संचालन सहदेव महतो द्वारा किया गया। इस दौरान संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करते हुए नए पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें अध्यक्ष पद पर लखन महतो, कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में राजेंद्र प्रजापति, सचिव के रूप में विनय महतो एवं सहदेव महतो तथा कोषाध्यक्ष पद पर सहदेव महतो को जिम्मेदारी सौंपी गई।
विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को मिलेगी नई दिशा
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रामचंद्र ठाकुर (सीटू प्रदेश उपाध्यक्ष) ने कहा कि यह सम्मेलन विस्थापितों के संघर्ष को नई ऊर्जा देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित संघर्ष समिति ने पहले भी डूमरी बिहार से टीटीपीएस तक रेल पथ निर्माण से प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया है।
उन्होंने कहा,
“समिति के प्रयासों का ही परिणाम है कि दर्जनों विस्थापितों को रोजगार मिला और कई गांवों में विकास कार्य शुरू हो पाए। लेकिन अभी भी कई मांगें लंबित हैं, जिनके लिए हमें फिर से संगठित होकर संघर्ष करना होगा।”
श्यामसुंदर महतो को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान समिति के पूर्व सचिव स्व. श्यामसुंदर महतो को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विस्थापितों की आवाज को बुलंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया था।
संगठन के विस्तार पर दिया गया जोर
सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राकेश कुमार (सीटू राज्य कमेटी सदस्य) ने कहा कि विस्थापित संघर्ष समिति अब पूरे क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि टीटीपीएस ललपनिया के संघर्ष से प्रेरित होकर ही गोमिया में भी विस्थापित संघर्ष समिति का गठन हुआ है।
उन्होंने कहा,
“यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाले संघर्षों की तैयारी है। बहुत जल्द टीटीपीएस प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा जाएगा और विस्थापितों के अधिकारों के लिए आंदोलन को तेज किया जाएगा।”
मुआवजा, रोजगार और विकास प्रमुख मुद्दे
सम्मेलन में विस्थापितों की प्रमुख समस्याओं—जैसे उचित मुआवजा, स्थायी रोजगार, बुनियादी सुविधाओं का विकास और पुनर्वास—पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर अब निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष लखन महतो और कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र प्रजापति ने संयुक्त रूप से कहा कि क्षेत्र के विस्थापित अब पूरी तरह एकजुट हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
“हम जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर मैदान में उतरेंगे। जब तक विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा,” उन्होंने कहा।
बड़ी संख्या में विस्थापितों की भागीदारी
इस सम्मेलन में अरुण प्रजापति, रीतलाल प्रजापति, बबुआ मांझी, उपेंद्र सिंह, मनोज महतो, राजेश पासवान, हरिचरण सिंह, नरेश चौधरी, बुधनी देवी, नुनी बिला देवी, रतनी देवी सहित बड़ी संख्या में विस्थापितों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संगठन को मजबूत बनाने और विस्थापितों के हक के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया। संघर्ष की नई शुरुआत
टीटीपीएस ललपनिया विस्थापित संघर्ष समिति सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के विस्थापित अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और संगठित होकर अपनी मांगों को मनवाने के लिए तैयार हैं। यह सम्मेलन आने वाले समय में बड़े आंदोलन की नींव साबित हो सकता है।
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