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बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में उठाए जाएं सख्त कदम - चंद्रशेखर

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बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में उठाए जाएं सख्त कदम – चंद्रशेखर

संवाददाता,लातेहार :– वेदिक सोसाइटी सचिव चंद्रशेखर सिंह समेत अन्य गैरसरकारी संगठनों ने अक्षय तृतीया से पूर्व राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करते बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में सख्त कदम उठाने की मांग की है।ज्ञात हो कि राजस्थान हाई कोर्ट के फौरी आदेश के बाद पूरे देश में इस तरह की आवाजें…

बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में उठाए जाएं सख्त कदम - चंद्रशेखर
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बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में उठाए जाएं सख्त कदम - चंद्रशेखर


संवाददाता,
लातेहार :– वेदिक सोसाइटी सचिव चंद्रशेखर सिंह समेत अन्य गैरसरकारी संगठनों ने अक्षय तृतीया से पूर्व राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करते बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में सख्त कदम उठाने की मांग की है।ज्ञात हो कि राजस्थान हाई कोर्ट के फौरी आदेश के बाद पूरे देश में इस तरह की आवाजें उठने लगी हैं कि उनके राज्य में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाए जाएं।वहीँ लातेहार में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के सहयोगी संगठन वेदिक सोसाइटी ने राज्य सरकार से अपील की कि वह भी इस का अनुसरण करते हुए सुनिश्चित करे कि अक्षय तृतीया के दौरान कहीं भी बाल विवाह नहीं होने पाए। हाई कोर्ट का यह फौरी आदेश ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस’ की जनहित याचिका पर आया है। इन संगठनों ने अपनी याचिका में इस वर्ष 10 मई को अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।याचियों द्वारा बंद लिफाफे में सौंपी गई अक्षय तृतीया के दिन होने वाले 54 बाल विवाहों की सूची पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को इन विवाहों पर रोक लगाने के लिए ‘बेहद कड़ी नजर’ रखने को कहा है। यद्यपि इस सूची में शामिल नामों में कुछ विवाह पहले ही संपन्न हो चुके हैं लेकिन 46 विवाह अभी होने बाकी हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल विवाह वह घृणित अपराध है जो सर्वत्र व्याप्त है और जिसकी हमारे समाज में स्वीकार्यता है। बाल विवाह के मामलों की जानकारी देने के लिए पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय करने का राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है। पंच व सरपंच जब बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक होंगे तो इस अपराध के खिलाफ अभियान में उनकी भागीदारी और कार्रवाइयां बच्चों की सुरक्षा के लिए लोगों के नजरिए और बर्ताव में बदलाव का वाहक बनेंगी। बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पूरी दुनिया के लिए एक सबक हैं और राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।बता दें कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस पांच गैर सरकारी संगठनों का एक गठबंधन है जिसके साथ 120 से भी ज्यादा गैर सरकारी संगठन सहयोगी के तौर पर जुड़े हुए हैं जो पूरे देश में बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार जैसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। हाई कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब अक्षय तृतीया के मौके पर बाल विवाह के मामलों में खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है और जिसे रोकने के लिए राज्य सरकारें और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम कर रहे तमाम गैर सरकारी संगठन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
वेदिक सोसाइटी के निदेशक चंद्रशेखर सिंह ने कहा, “राजस्थान हाई कोर्ट का यह आदेश ऐतिहासिक है जिसके दूरगामी नतीजे होंगे। देश में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब पंचायती राज प्रणाली को यह शक्ति दी गई है कि वह सरपंचों को अपने क्षेत्राधिकार में बाल विवाहों को रोकने में विफलता के लिए जवाबदेह ठहरा सके। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के सहयोगी के तौर पर हम पूरे देश के जिलाधिकारियों से इसी तरह के कदम उठाने की अपील करते हैं। जमीनी स्तर पर हमारी पहलों ने यह साबित किया है कि बाल विवाह जैसे मुद्दों के समाधान में सामुदायिक भागीदारी सबसे अहम है। यह अदालती आदेश बच्चों की सुरक्षा के लिए समुदायों को लामबंद करने में स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है।

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