पाकुड़ संवाददाता।
पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के झेनागढ़िया गांव में बुधवार देर रात हुई दोहरी हत्या की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाली वारदात की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन तीन मासूम बच्चों की है, जिनकी दुनिया एक ही रात में उजड़ गई।
मात्र पांच वर्षीय आफरीन खातून मासूमियत से लोगों से पूछ रही है, “मां आंखों अतो…?” वहीं ढाई वर्षीय माहिया खातून भी अपनी बड़ी बहन से बार-बार पूछ रही है कि “मां कब आएगी?” जबकि महज छह माह का अलेस अंसारी अपनी मां की गोद और दूध के लिए बिलख रहा है। इन मासूमों को यह तक नहीं मालूम कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही।
जानकारी के अनुसार 21 वर्षीय गुलचेहरा बीबी की उसके पति ने बेरहमी से हत्या कर दी। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचीं उसकी 45 वर्षीय मां को भी आरोपी ने चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया। एक ही पल में बच्चों के सिर से मां का आंचल और नानी का साया दोनों छिन गया।
घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हर कोई इन बच्चों की हालत देखकर भावुक हो उठता है। किसी की आंखें नम हैं तो किसी के पास इन मासूम सवालों का कोई जवाब नहीं है। अब सबसे बड़ी चिंता इन बच्चों के भविष्य को लेकर है—उनकी परवरिश कौन करेगा, उन्हें मां का प्यार कौन देगा और उनकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
कहा जाता है कि किसी भी बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह उसकी मां की गोद होती है, लेकिन इन तीनों मासूमों से वह सहारा हमेशा के लिए छिन गया। अब उनके हिस्से में रह गई है केवल खामोशी, आंसू और मां की यादें।
यह घटना केवल दो हत्याओं की नहीं, बल्कि तीन मासूम जिंदगियों से बचपन छिन जाने की दर्दनाक कहानी बन गई है।