पाकुड़, संवाददाता।
सरकार जहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषण मुक्त भारत, बच्चों के स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने का दावा कर रही है, वहीं महेशपुर प्रखंड के रद्दीपुर ओपी क्षेत्र अंतर्गत श्रीरामगढ़िया पंचायत के चांदपुर गांव का आंगनबाड़ी केंद्र इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है।
यह केंद्र एक बड़े पत्थर खदान के बिल्कुल समीप संचालित हो रहा है, जहां मासूम बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर पोषण और शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। खदान में लगातार होने वाली ब्लास्टिंग, उड़ती धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र से महज 10 कदम की दूरी पर पत्थर खदान संचालित है। ब्लास्टिंग और मशीनों की तेज आवाज के कारण केंद्र की सेविका भी भय के माहौल में काम कर रही है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अधिकांश दिनों में केंद्र का संचालन सेविका अपने घर से ही करती हैं, जबकि मूल केंद्र भवन कभी-कभार ही खुलता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली पत्थर की धूल से केंद्र परिसर और बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार भी प्रभावित हो रहा है। लंबे समय तक ऐसी धूल के संपर्क में रहने से बच्चों में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है।
केंद्र के समीप से लगातार ओवरलोड डंपरों का आवागमन होता है, जिससे बच्चों के आने-जाने के दौरान हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। क्षेत्र में न तो सुरक्षा घेराबंदी है और न ही धूल नियंत्रण की कोई समुचित व्यवस्था।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आंगनबाड़ी केंद्र को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। यदि यह संभव नहीं हो तो केंद्र के चारों ओर सुरक्षा दीवार, धूल नियंत्रण के उपाय और भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।