संवाददाता : अनुज तिवारी,
सतबरवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत औरंगा नदी एवं उसके आसपास के इलाकों में बालू का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। हालात यह हैं कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा हर वर्ष अवैध उत्खनन पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू किए गए नियम महज कागजी साबित हो रहे हैं।
वन, पर्यावरण एवं उसमें रहने वाले जीव-जंतु पर अवैध खनन के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए एनजीटी कड़े निर्देश जारी करता है। बावजूद इसके बालू माफिया खुलेआम इन नियमों की धज्जियां उड़ाते नज़र आ रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि न केवल नदी और तटवर्ती क्षेत्रों की जैव विविधता प्रभावित हो रही है बल्कि भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कई बार पलामू जिला प्रशासन और सरकारी महकमों को सीधी चुनौती देते हुए बालू माफिया उत्खनन में लिप्त पाए गए हैं। इससे यह साफ झलकता है कि नियामक एजेंसियों की पकड़ कमजोर है और अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब एनजीटी और जिला प्रशासन लगातार नियम लागू करने की बात करते हैं तो आखिर ये अवैध उत्खनन रुक क्यों नहीं रहा? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर माफियाओं का प्रभाव इतना मजबूत है कि कानून भी बौना साबित हो रहा है?
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर इस पर तत्काल सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले वर्षों में औरंगा नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। साथ ही, इससे जुड़ी हजारों ग्रामीणों की आजीविका और प्राकृतिक संतुलन भी गंभीर संकट में फंस जाएगा।