सतबरवा, पलामू:- 19 जुलाई को भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी कहे जाने वाले अमर क्रांतिकारी शहीद मंगल पांडे को पूरे देश के साथ-साथ सतबरवा प्रखंड में भी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में युवाओं ने रैली निकाल कर देशभक्ति नारों के साथ मंगल पांडे के बलिदान को नमन किया। संगोष्ठियों में वक्ताओं ने उनके जीवन और बलिदान पर प्रकाश डाला और कहा कि मंगल पांडे वह पहला सिपाही थे, जिनकी क्रांति की चिंगारी ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।
मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री में सिपाही थे। जब कंपनी ने सैनिकों को गाय और सूअर की चर्बी से लिप्त कारतूस देना शुरू किया, तो मंगल पांडे ने उसका जोरदार विरोध किया और 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में ब्रिटिश अफसरों पर हमला कर दिया।
हालांकि उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, लेकिन उनके साहस और बलिदान ने देश में आज़ादी की अलख जगा दी। उनका यह बलिदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
कार्यक्रम के अंत में शहीद मंगल पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह पंक्तियाँ गूंज उठीं:
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा…”