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पश्चिम बंगाल की हिंसा से सहमे परिवारों का पलायन, मिर्जाचौकी में लिया शरण

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पश्चिम बंगाल की हिंसा से सहमे परिवारों का पलायन, मिर्जाचौकी में लिया शरण

बरहरवा, झारखंड | सवाददता, पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून को लेकर उपजे विवाद के बाद फैली हिंसा ने कई परिवारों की जिंदगी में तबाही ला दी है। मुर्शिदाबाद जिले के रानीपुर डिग्री इलाके में हुई आगजनी, लूटपाट और मारपीट की घटनाओं के बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन…

पश्चिम बंगाल की हिंसा से सहमे परिवारों का पलायन, मिर्जाचौकी में लिया शरण
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पश्चिम बंगाल की हिंसा से सहमे परिवारों का पलायन, मिर्जाचौकी में लिया शरण


बरहरवा, झारखंड | सवाददता,

पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून को लेकर उपजे विवाद के बाद फैली हिंसा ने कई परिवारों की जिंदगी में तबाही ला दी है। मुर्शिदाबाद जिले के रानीपुर डिग्री इलाके में हुई आगजनी, लूटपाट और मारपीट की घटनाओं के बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इसी क्रम में वहां के 12 लोग, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं, पश्चिम बंगाल से पलायन कर झारखंड के साहिबगंज जिले के मिर्जाचौकी थाना अंतर्गत नयाटोला गांव पहुंचे हैं। इन लोगों ने अपने रिश्तेदारों के घर में शरण ली है।

पीड़ित परिवारों ने रोते हुए बताया कि किस तरह उपद्रवियों ने उनके घरों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट की। अमीत राय, अमृता राय, सुमित राय, प्रीति दास, लख्खी राय और उनके साथ आए दो छोटे बच्चे ऋषि राय एवं सिजोन राय ने बताया कि हिंसा के दौरान न केवल उनके घर जलाए गए, बल्कि घरेलू जानवर जैसे बकरी और खस्सी तक लूट लिए गए। उपद्रवी न सिर्फ संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे थे बल्कि महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा। उन्हें किसी तरह अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पहले पश्चिम बंगाल के पाकुड़ जिले के रास्ते से होते हुए ट्रेन के जरिए मिर्जाचौकी पहुंचे और अब अपने रिश्तेदारों के यहां नयाटोला गांव में अस्थायी रूप से रह रहे हैं। इन लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि उनके सुरक्षा की गारंटी दी जाए और उनके घर-परिवार की स्थिति सामान्य होने तक उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए।

इन घटनाओं से पीड़ित अमृता राय कहती हैं, “हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपने ही देश में इस तरह शरणार्थी की तरह भटकना पड़ेगा।” वहीं लख्खी राय कहती हैं, “बुजुर्ग लोग अब भी गांव में फंसे हैं। हम केवल फोन पर ही उनका हाल-चाल ले पा रहे हैं। हर वक्त डर लगा रहता है कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए।”

पलायन कर आए इन लोगों की मानसिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। वे सदमे में हैं और बच्चों की आंखों में डर साफ झलक रहा है। बच्चे भी अब सामान्य व्यवहार नहीं कर पा रहे हैं। कुछ महिलाएं फूट-फूटकर रोते हुए कहती हैं कि अब वे वहां वापस नहीं लौटेंगी, जब तक प्रशासन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।

इस संबंध में मिर्जाचौकी के स्थानीय लोगों ने भी पलायन कर आए परिवारों के लिए सहानुभूति दिखाई है। गांव के कुछ लोगों ने उन्हें अस्थायी भोजन और कपड़े उपलब्ध कराए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक है कि जिला प्रशासन व राज्य सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करे और पीड़ितों की सुरक्षा, पुनर्वास एवं न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए। साथ ही, बंगाल सरकार से समन्वय स्थापित कर स्थिति की जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

पलायन कर आए लोगों की यही अपील है कि उन्हें सुरक्षित महसूस कराया जाए और उनकी मूलभूत जरूरतें पूरी की जाएं, ताकि वे भय के साए से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

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