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लातेहार:जिले के पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना की जानकारी

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लातेहार:जिले के पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना की जानकारी

लातेहार:- जिला के सभी पशुपालकों के लिए गव्य विकास विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत कई लाभकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में सुधार लाना और किसानों की आय बढ़ाना है। योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को अनुदान, उपकरण, प्रशिक्षण, और…

लातेहार:जिले के पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना की जानकारी
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लातेहार:जिले के पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना की जानकारी

लातेहार:- जिला के सभी पशुपालकों के लिए गव्य विकास विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत कई लाभकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में सुधार लाना और किसानों की आय बढ़ाना है। योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को अनुदान, उपकरण, प्रशिक्षण, और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। निम्नलिखित योजनाओं के तहत लाभ उठाया जा सकता है:

1. दो दुधारू गाय योजना (1+1)

इस योजना का उद्देश्य पशुपालकों को दो दुधारू गाय उपलब्ध कराना है। योजना में प्राकृतिक आपदाओं, आगलगी, सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित विधवा, दिव्यांग या निःसंतान महिलाएं (जिनकी उम्र कम-से-कम 50 वर्ष हो) और परित्यक्ता महिलाएं (जिनकी उम्र 55 वर्ष से कम हो) को 90% अनुदान दिया जाएगा। अन्य लाभार्थियों को 75% अनुदान मिलेगा। इस योजना की इकाई लागत 1,35,050 रुपये निर्धारित की गई है। यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए पशुपालन में निवेश करना चाहते हैं।

2. पाँच दुधारू गाय की मिनी डायरी योजना (3+2) और दस दुधारू गाय की मिडी डायरी योजना (5+5)

इस योजना के तहत 3+2 (पाँच गायों) और 5+5 (दस गायों) के पैकेजों के माध्यम से मिनी और मिडी डायरी योजना चलायी जा रही है। इन योजनाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दूध सहकारी समितियों के सदस्य को 75% तक अनुदान मिलेगा, जबकि अन्य लाभार्थियों को 50% तक अनुदान मिलेगा। मिनी डायरी योजना की इकाई लागत 3,37,625 रुपये और मिडी डायरी योजना की इकाई लागत 6,75,250 रुपये निर्धारित की गई है। इस योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन को बढ़ाना और पशुपालकों को समुचित सुविधाएं प्रदान करना है।

3. मनरेगा अभिषरण से शेड निर्माण

इस योजना के तहत मनरेगा अभिषरण से पशुओं के लिए शेड निर्माण का प्रावधान है, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान पर रखने की सुविधा मिलेगी। यह पहल उनके पशुपालन के काम को सुगम और अधिक लाभकारी बनाएगी।

4. हस्त चलित और विद्युत चलित चैफ कटर योजना

इस योजना के तहत हस्त चलित चैफ कटर (जो 8,000 रुपये की लागत पर उपलब्ध है) और विद्युत चलित चैफ कटर (जो 20,000 रुपये की लागत पर उपलब्ध है) प्रदान किए जाएंगे। इन उपकरणों का उपयोग चारा काटने के लिए किया जाता है, जिससे पशुपालकों को चारा प्रबंधन में सुविधा होती है और समय की बचत होती है।

5. मिलकिंग मशीन, पनीर एवं खोया मेकिंग यूनिट, बर्मी कंपोस्ट यूनिट, डीप बोरिंग और काउ मैट योजनाएं

इन योजनाओं के तहत विभिन्न उपकरण और यूनिट्स प्रदान किए जाएंगे, जैसे मिलकिंग मशीन (1,20,000 रुपये), पनीर एवं खोया मेकिंग यूनिट (1,00,000 रुपये), बर्मी कंपोस्ट यूनिट (25,000 रुपये), डीप बोरिंग (1,00,000 रुपये), और काउ मैट (5,200 रुपये)। इन उपकरणों का उद्देश्य पशुपालकों को उनके व्यवसाय को और अधिक प्रोडक्टिव और लाभकारी बनाने में मदद करना है।

6. निःशुल्क 6 दिवसीय गौ पालन प्रशिक्षण

गव्य विकास विभाग द्वारा निःशुल्क 6 दिवसीय गौ पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पशुपालकों को गौ पालन के नवीनतम तकनीकों, खाद्य प्रबंधन, रोगों से बचाव और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों के बारे में सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र धारकों को योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।

7. ग्राम स्तर पर 1 दिवसीय स्थल प्रशिक्षण कार्यक्रम

यह कार्यक्रम ग्राम स्तर पर आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले लाभार्थियों को 200 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण पशुपालकों को बेहतर पशुपालन की जानकारी और स्थानीय स्तर पर सहायता प्रदान करेगा।

लाभ के पात्र

  • लाभार्थी झारखंड राज्य का किसान और स्थानीय निवासी होना चाहिए।
  • लाभार्थी के पास खेती और पशुपालन के लिए उपयुक्त भूमि होनी चाहिए।
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दूध सहकारी समिति के सदस्य और दिव्यांग जनों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।
  • इस योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित लाभार्थियों को सभी आवश्यक कागजी दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

योजना का महत्व

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना से न केवल पशुपालकों को आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में दूध उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके अलावा, पशुपालन के क्षेत्र में तकनीकी सुधार, बेहतर उपकरण, और प्रशिक्षण से पशुपालकों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

यह योजना झारखंड राज्य के किसानों और पशुपालकों को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। पशुपालन से संबंधित इन योजनाओं से लाभ उठाकर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाई जा सकती है।


लातेहार जिले के पशुपालकों को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के माध्यम से विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का सुनहरा अवसर मिला है। इन योजनाओं का उद्देश्य उन्हें अधिक से अधिक लाभ देना और उनके व्यवसाय को बढ़ावा देना है। पशुपालन से संबंधित इन योजनाओं का हिस्सा बनकर पशुपालक अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं और कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में नई संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

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