कोटालपोखर संवाददाता | पाकुड़
पाकुड़ जिले के पश्चिम बंगाल सीमा से सटे कोटालपोखर क्षेत्र में प्रखंड गठन की मांग एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 1983 से चली आ रही यह मांग आज भी पूरी नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र के लोगों में निराशा बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी मांग सरकारी फाइलों में ही सिमटकर रह गई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के बाद कई सरकारें बनीं, मुख्यमंत्री, विधायक और सांसद बदले, लेकिन कोटालपोखर को प्रखंड बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। लोगों का मानना है कि प्रखंड बनने से प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि कोटालपोखर को जल्द प्रखंड का दर्जा देकर वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े और क्षेत्र के समग्र विकास का रास्ता खुल सके।