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राजनाथ ने बालिकाओं के लिए पहले सैनिक स्कूल का किया उद्घाटन

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राजनाथ ने बालिकाओं के लिए पहले सैनिक स्कूल का किया उद्घाटन

नयी दिल्ली (Rns) : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मथुरा के वृन्दावन में बालिकाओं के लिए पहले पूर्ण सैनिक विद्यालय संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया। इस विद्यालय में 870 बालिका विद्यार्थियों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस स्कूल का उद्घाटन सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में गैर सरकारी संगठनों,निजी क्षेत्र…

राजनाथ ने बालिकाओं के लिए पहले सैनिक स्कूल का किया उद्घाटन
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राजनाथ ने बालिकाओं के लिए पहले सैनिक स्कूल का किया उद्घाटन

नयी दिल्ली (Rns) : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मथुरा के वृन्दावन में बालिकाओं के लिए पहले पूर्ण सैनिक विद्यालय संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया। इस विद्यालय में 870 बालिका विद्यार्थियों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस स्कूल का उद्घाटन सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में गैर सरकारी संगठनों,निजी क्षेत्र और राज्य सरकार के विद्यालयों के साथ साझेदारी के अंतर्गत 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना की पहल के तहत किया गया है, जिनमें से 42 विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। ये मौजूदा 33 सैनिक स्कूलों के अतिरिक्त बनाये गये विद्यालय हैं, जो पहले से ही पूर्ववर्ती तरीकों के तहत संचालित किये जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर संविद गुरुकुलम बालिका सैन्य विद्यालय को उन लड़कियों के लिए आशा की किरण बताया, जो सशस्त्र बलों में शामिल होने तथा मातृभूमि की रक्षा करने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में महिलाओं को सशस्त्र बलों में उनका उचित स्थान दिया है, जो वर्षों से उपेक्षित रही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों की तरह ही राष्ट्र की रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के इतिहास में वह स्वर्णिम क्षण था, जब हमने सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश लेने को स्वीकृति प्रदान की थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज देश की महिलाएं न केवल लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, बल्कि वे सीमाओं की सुरक्षा भी कर रही हैं।


मेरठ में स्पोर्ट्स कारोबारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या

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मेरठ, (Rns) : उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिनदहाड़े एक स्पोर्ट्स कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने यहां बताया कि परतापुर क्षेत्र के घाटपुर निवासी सुधीर कुमार शर्मा की बागपत रोड पर गुर्जर चौक में एसआर स्पोर्ट्स के नाम से खेल के सामान की दुकान है। सुधीर आज धूप सेंकने के लिए दुकान के बाहर अपने कुछ साथी दुकानदारों के साथ खड़े थे। बताया गया है कि इसी दौरान फ्लाईओवर के ऊपर से कुछ अज्ञात हमलावरों ने दो गोलियां चलाईं जिसमें एक सुधीर के सीने में लगी और वह गिर गये। उनके साथियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस अधीक्षक देहात कमलेश बहादुर ने छानबीन के आधार पर आशंका व्यक्त की है कि संभवत हमलावरों ने गोली सुधीर से कुछ दूरी पर खड़े कार सवार युवकों पर चलाई थी, जिसका निशाना सुधीर बन गये। उन्होंने बताया कि आस पास के सीसीटीवी कैमरों से फुटेज निकाल कर हमलावरों की शिनाख्त के प्रयास किये जा रहे हैं।


राम के लिए बलिदान कोठारी बंधुओं की बहन ने कहा, एक बार मोदी जी से मिलना है…

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सिलीगुड़ी , (Rns) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नित्य सैकड़ों लोगों से मिलते हैं। 33 साल पहले दो भाईयों के बलिदान होने के बाद दुख और गर्व के साथ राम मंदिर के लिए संघर्ष करने वाली एक बहन भी उनसे मिलने को आतुर हैं। वह उन्हें दंडवत प्रणाम करना चाहती हैं। उनकी मां के आंसू नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद थम गए थे। उसके पहले मां अयोध्या जाती थीं तो रामलला के पास खड़ी होकर खूब रोती थीं। बिलखती थीं। लोग अचरज से देखते थे। यह कौन रामभक्त हैं…जो उन्हें देखकर रोती है? फिर पता चलता था कि यह राम कोठारी और शरद कोठारी की मां हैं।
1990 में जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में भाग लेकर मुलायम सिंह सरकार में पुलिस की गोली से बलिदान हो गए। कोठारी बंधुओं की मां जानकर लोग उनके पैर छूने लगते थे। वर्दी वाले जवान भी उन्हें प्रणाम करने लगते थे। 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बने तो वह पूरे विश्वास से कहती थीं कि अब रोने की जरूरत नहीं है। अब अयोध्या में राम आएंगे। 2016 में राम और शरद कोठारी की मां सुमित्रा लाल कोठारी का निधन हो गया। बहन पूर्णिमा कोठारी कोलकाता में रहती हैं। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए उनके पास आमंत्रण पत्र आया है, लेकिन वह 10 जनवरी को ही अयोध्या पहुंच जाएंगी। वह अयोध्या में राम के ‘आगमनÓ के पूर्व की प्रत्येक गतिविधि और घटना को अपने हृदय में बसा लेना चाहती हैं। वर्षों तक उन्होंने इस दिन का इंतजार किया है। पूर्णिमा कहती हैं कि 1990 के बाद राम मंदिर के लिए अधिसंख्य संघर्ष में वह अयोध्या गई हैं। तब लगता था कि दशरथ की यह नगरी उदास है। उजाड़ है। राम के आगमन की खबर आई तो मौसम ही बदल गया। अपनी अयोध्या में अपने राम आ रहे हैं। मन में भी ढोल-नगाड़े बजते हैं। पूर्णिमा 1990 के पूर्व अपने घर-आंगन को याद करती हैं। वह घरेलू लड़की थीं। दोनों भाई राम, अयोध्या और राष्ट्रनिर्माण की बातें करते थे। वह सुनती थीं, लेकिन बहुत मतलब नहीं रहता था। भाई बलिदान हुए तो माता-पिता और पूर्णिमा दुख से नहीं घिरे। घर से निकल पड़े। भाईयों के नाम पर संगठन बनाया। राम मंदिर के लिए हर संघर्ष में शामिल हुए। पूर्णिमा के पिता हीरा लाल कोठारी और माता सुमित्रा लाल कोठारी राम मंदिर निर्माण का शुभ दिन देखने के पूर्व ही दिवंगत हो गए, लेकिन पूर्णिमा को लगता है कि वह आसपास ही हैं।

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