मजदूर भाईयों , असली एवं नकली को पहचानिए : टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन

मजदूर भाईयों , असली एवं नकली को पहचानिए : टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन
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मजदूर भाईयों , असली एवं नकली को पहचानिए : टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन

जमशेदपुर : केवल और केवल समाचार पत्रों में बने रहने के लिए एक बड़े मजदूर समुदाय को कोर्ट कचहरी में डालने का प्रयास किया जा रहा है। वे लोग , जो खुद भी कोर्ट कचहरी का चक्कर काट रहे हैं , चाहते हैं कि 2600 अस्थाई कर्मचारी कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ जाए और उनके पीछे – पीछे घूमें। हम बता देना चाहते हैं कि यहां के मजदूरों ने हमें नेतृत्व करने का मौका दिया है हम पूरा प्रयास करेंगे कि एक ऐसा समझौता हम कराने में सफल हों जो प्रत्येक कर्मचारी को खुशी-खुशी स्वीकार हो। हम यह मानते हैं कि एक-एक अस्थाई कर्मचारी हमारे अभिन्न अंग हैं उनका स्थाईकरण हर हाल में होगा और ज्यादा से ज्यादा होगा। यह यूनियन की प्राथमिकता है। उपरोक्त बातें टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेसवार्ता में अध्यक्ष गुरमीत सिंह, महामंत्री आरके सिंह एवं सलाहकार प्रवीण सिंह द्वारा संयुक्त रूप से कही गई। प्रेसवार्ता यूनियन कार्यालय में आयोजित की गई।
महामंत्री आरके सिंह ने कहा कि अस्थाई मजदूर जमशेदपुर प्लांट से किसी अन्य प्लांट में नहीं जाएंगे। वे हर हाल में स्थाईकरण के बाद जमशेदपुर प्लांट को ही अपनी सेवा देंगे। यहीं वें रहकर अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत करेंगे। इसके लिए यूनियन कटिबद्ध है। आगे कहा कि यूनियन इसके लिए भी तैयार है कि जो दो-चार लोग , रोड़ पर घूमकर इस वार्ता को भंग करना चाहते हैं वे लोग दरअसल मामले को कोर्ट कचहरी में ले जाना चाहते हैं । वैसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब यहां के कर्मचारी देंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है।


गौरतलब हो कि अस्थाई कर्मचारियों के मामले को लेकर सरकार , श्रम विभाग , प्रबंधन‌ एवं यूनियन के बीच लगातार वार्ता जारी है । इसी बीच टेल्को वर्कर्स यूनियन के नेता हर्षवर्धन सिंह एवं अन्य के द्वारा अस्थाई कर्मचारियों के मामले में कूद पड़ने से दोनों यूनियनों के बीच वाक्य युद्ध छिड़ गई है।
यूनियन के सलाहकार प्रवीण सिंह ने कहा कि हम प्रेस के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि यूनियन ज्यादा से ज्यादा संख्या में अस्थाई कर्मचारियों को स्थाईकरण के लिए इच्छुक है एवं जो परंपरा वार्ड रजिस्ट्रेशन एवं कर्मचारी पुत्रों के नियोजन की हमारे यहां है वह पूर्व की भांति चलता रहे। यह हमारी कोशिश है। हालांकि स्थाईकरण का संख्या बल बढ़ाने के लिए यूनियन लगातार प्रयासरत है। प्रबंधन भी गंभीर है। मैं अस्थाई कर्मचारी भाइयों से यह भी कहना चाहता हूं कि एक तरफ जहां यूनियन जी जान से यह प्रयास कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा अस्थाई कर्मचारियों का स्थाईकरण किया जाए वहीं टेल्को वर्कर्स यूनियन के नाम पर अपनी रोटी सेंकने वाले कुछ असामाजिक लोग इस वार्ता में जबरदस्ती घुसना चाहते हैं। यहां – वहां पत्राचार कर मामले को केस – मुकदमें एवं ट्रिब्यूनल में ले जाकर मामले को लटकाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आप सब जानते हैं कि यदि अस्थाई कर्मचारियों के विषय में केस मुकदमा हो जाता है तो उनका जीवन बर्बाद हो जाएगा। केस का फैसला कितने वर्षों में आएगा और प्रबंधन उसे कितना लंबा खिंच सकती है इसका अंदाज़ा सभी कर्मचारियों को भी है। आज समय आ गया है कि वैसे लोग जो इस वार्ता में बाधा बनने की कोशिश कर रहे हैं या इस मामले को कोर्ट में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं उन्हें चिन्हित कर सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें यदि अपना हक चाहिए तो हमारे मामले में जो भी संदिग्ध लोग घुसने की प्रयास कर रहे हैं उसका मुंहतोड़ जवाब अस्थाई कर्मचारी दें।

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महामंत्री आरके सिंह ने कहा कि बहुत अजीब बात है कि हर्षवर्धन सिंह लगभग 8 साल तक टेल्को वर्कर्स यूनियन का रजिस्ट्रेशन समाप्त करने के लिए पूर्व में लड़ाई लड़ें और जब सरकार के द्वारा 980 यूनियनों की मान्यता रद्द कर दी गई तब उसी क्रम में टेल्को वर्कर्स यूनियन की मान्यता भी रद्द हो गई। परंतु बार-बार उपश्रमायुक्त को पत्र देने के बाद भी पूरे दस्तावेज के साथ वह श्रम मंत्रालय में अपने रजिस्ट्रेशन की खानापूर्ति को पूरा नहीं कर पाया ऐसे में आज वह कह रहा है कि हम रजिस्टर्ड यूनियन है और हमसे वार्ता की जानी चाहिए। यह भ्रम पैदा करता है। आगे उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए अपने आप को इस पूरे प्रकरण में शामिल करने के लिए कोर्ट कचहरी और ट्रीब्यूनल में मामले को ले जाने की बातें कर रहे हैं। आज मजदूर जागरुक है निश्चित तौर पर वैसे लोगों को चिन्हित करेगी।


अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि हम सब एक बार फिर से ऐसा समझौता करेंगे जो सर्वमान्य हो। उन्होंने कहा कि हो सकता है थोड़ा विलंब हो पर यह यूनियन हमेशा से मजदूर हितों को ध्यान में रखकर समझौता करती रही है। सरकार एवं प्रबंधन के बीच सारी बातों को साफ तौर पर रख दिया गया है । किसी भी सूरत में अस्थाई बाहर नहीं जाएंगे , अन्य प्लांट में भी नहीं जाएंगे। वार्ड रजिस्ट्रेशन भी बंद नहीं होगा । हम सब ज्यादा से ज्यादा अस्थाई साथियों का स्थायीकरण के लिए रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। ऐसे में कोई स्वहित के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करें यह दुखद बात है। आगे कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि हम जो समझौता करके आएंगे उससे एक-एक कर्मचारी , चाहे वह अस्थाई कर्मचारी हो या स्थाई कर्मचारी, सबों को लाभ पहुंचेगा। हम सबों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध हैं।

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