सत्ता के शिखर पर पहुंचकर भी मजदूरों से नहीं टूटा नाता
कथारा (झारखंड)। झारखंड-बिहार के पूर्व मंत्री, प्रख्यात मजदूर नेता और इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय महासचिव रहे राजेंद्र प्रसाद सिंह की छठी पुण्यतिथि कथारा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय सह राजेंद्र प्रसाद सिंह स्मृति भवन में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में यूनियन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरसीएमयू के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन क्षेत्रीय सहायक सचिव विजय यादव ने किया। सभा की शुरुआत स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसके बाद उनके योगदान और व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
मजदूरों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह का पूरा जीवन मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा। उन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा,
“राजेंद्र बाबू ने मजदूरों की आवाज को बुलंद करने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया। उनके प्रयासों के कारण ही आज श्रमिकों को सम्मान और उनके अधिकारों की पहचान मिली है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई नई पहचान
सभा में मौजूद क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने संयुक्त बिहार और झारखंड में मंत्री रहते हुए तथा कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में संगठन को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस और राकोमसं (राकोमसं) को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है। “उन्होंने न केवल संगठन को मजबूत किया, बल्कि मजदूरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी,” उन्होंने जोड़ा।
हर वर्ग के नेता थे राजेंद्र प्रसाद सिंह
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह केवल एक मजदूर नेता ही नहीं, बल्कि जन-जन के नेता थे। मोहम्मद इसराफिल अंसारी ने कहा कि वे ऐसे नेता थे जो हर व्यक्ति की बात ध्यान से सुनते थे और सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे।
उन्होंने कहा,
“सत्ता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद उन्होंने कभी अपने मूल सिद्धांतों और मजदूरों से दूरी नहीं बनाई। यही कारण है कि आज भी हर मजदूर उन्हें अपना मसीहा मानता है।”
सादगी, संघर्ष और समर्पण की मिसाल
स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह का जीवन सादगी, संघर्ष और समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में हमेशा मजदूर वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी। चाहे खदानों की सुरक्षा का मुद्दा हो, वेतन वृद्धि की मांग हो या श्रमिकों के अधिकारों की बात—हर मोर्चे पर उन्होंने मजबूती से अपनी आवाज उठाई।
उनके नेतृत्व में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे हजारों मजदूरों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिला। यही कारण है कि आज भी उनका नाम मजदूरों के बीच सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
इस श्रद्धांजलि सभा में कई प्रमुख लोग और यूनियन पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें सुनीता सिंह, देवाशीष आस, प्रमोद यादव, राजेंद्र वर्मा, कमलकांत सिंह, रणजीत सिंह, दीपक कुमार, गोपाल राम, श्रवण चौहान, अर्जुन चौहान, सुरेश महतो, आर.के. सिंह, विजय कुमार नायक, शंभू कुमार, बिरजा कृष्ण, संतोष कुमार सिंह, रवि कुमार, रमाकांत सिंह, नसीम अख्तर, मोहम्मद शमी, बेणेश्वर नोनिया और राजकुमार राय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह के बताए मार्ग पर चलने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
मजदूरों के दिलों में आज भी जिंदा हैं “मसीहा”
स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह उनके विचारों और संघर्षों को याद करने का अवसर भी था।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेता वही होता है जो सत्ता में रहते हुए भी अपने मूल सिद्धांतों और जनता से जुड़ा रहे। आज भी हजारों मजदूर उन्हें अपना “मसीहा” मानते हैं और उनके दिखाए रास्ते पर चलने की प्रेरणा लेते हैं।
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