रिपोर्ट: दिनेश यादव, सतबरवा (पलामू)
पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड क्षेत्र में किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली मलय डैम की नहर (चैनल संख्या 18) पिछले कई महीनों से टूटी पड़ी है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के सामने खेती को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
खेती के समय बढ़ी चिंता
जैसे-जैसे खेती का मौसम नजदीक आ रहा है, किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है।
बीते वर्ष दिसंबर में नहर टूटने के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ था, और आज तक इसकी मरम्मत नहीं होने से स्थिति और भी विकट होती जा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज
किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार सिन्हा ने पहल करते हुए झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं वर्तमान प्रतिपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी को मांग पत्र सौंपा।
इस दौरान युवा नेता प्रवेश यादव, सांसद प्रतिनिधि दीपक राज सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।
मंत्री से सीधी बातचीत, मिला आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाबूलाल मरांडी ने तुरंत पहल करते हुए झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन से दूरभाष पर बातचीत की।
मंत्री हफीजुल हसन ने आश्वासन दिया कि जल्द ही विभागीय अधिकारियों को स्थल पर भेजकर स्थिति का आकलन कराया जाएगा और नहर की मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।
मलय डैम: किसानों की ‘लाइफलाइन’
मलय डैम क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। इसकी नहरों पर ही पूरे इलाके की खेती निर्भर करती है। नहर टूटने से न सिर्फ सिंचाई बाधित हुई है, बल्कि आने वाले सीजन में भी फसल उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है।
यह मामला सिर्फ एक नहर टूटने का नहीं, बल्कि ग्रामीण कृषि व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता है। समय पर मरम्मत नहीं होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।
👉 यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या बड़े कृषि संकट का रूप ले सकती है।