संवाददाता
लातेहार :- जिले में गुरुवार को वट सावित्री व्रत धूमधाम से मनाया गया। हिन्दू धर्मावलंबी महिलाओं ने व्रत रखकर सुहाग सलामती की कामना की। व्रत को लेकर सुबह से ही महिलाओं का हुजूम शहर के विभिन्न बरगद पेड़ के नीचे दिखने लगा था।पंडित संतोष मिश्रा ने डीसी आवास व राकेश मिश्रा ने धर्मपुर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न करवाया।इस दौरान महिलाओं ने विधि विधान के साथ वट वृक्ष का पूजन किया एवं वृक्ष में कच्चा सूत बांधकर परिक्रमा लगाई।सोमेश्वर साई मंदिर के पुजारी संतोष मिश्रा ने बताया कि पुरातनकाल में सती सावित्री ने इस व्रत को किया था तथा सदा-सुहागन रहने की मंगलकामना की थी।
व्रत के परिणाम स्वरूप उनके पति की उम्र पूरी हो जाने के बाद भी यमराज ने पुनः जीवनदान दिया था। तबसे यह व्रत पृथ्वी लोक पर प्रचलित है और सुहागिन महिलाएं इस व्रत को धारण करती रही हैं।वहीँ व्रत को लेकर दिनभर सड़कों पर रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाओं की भीड़ देखी गई। जिला मुख्यालय के बाजारटांड़, धर्मपुर, गुरुद्वारा रोड, तापा पहाड़ी, करकट, लातेहार स्टेशन, डुरुआ के अलावे सदर प्रखंड के नावागढ़, तरवाडीह, होटवाग, पोचरा, समेत कई स्थानों पर वट वृक्ष के नीचे महिलाओं को पूजन करते देखा गया।इसके अलावे ग्रामीण क्षेत्रों में भी वट सावित्री पूजन को लेकर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। वट वृक्ष में धागा बांधकर परिक्रमा कर महिलाओं ने अपने पति की रक्षा की कामना की। महिलाओं ने उपवास रखकर पूजा-अर्चना कर बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर कथा सुनकर पूजा-अर्चना की।बताते चलें कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन वट सावित्री की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाओं द्वारा उपवास रखा जाता है, जो बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत को करवा चौथ जितना ही महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री अपने मृत पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस ले आई थीं। तब से विवाहित महिलाएं हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।