कोटालपोखर संवाददाता। केशव तिवारी,
उधवा झील पक्षी आश्रयणी में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। संरक्षित क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष गश्ती अभियान के दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित रूप से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने और अवैध रूप से शिकार करने की कोशिश में संलिप्त था। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वन विभाग संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम नियमित गश्ती पर निकली हुई थी। यह अभियान हाल के दिनों में बढ़ती अवैध गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है, ताकि पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। गश्ती के दौरान टीम की नजर एक संदिग्ध व्यक्ति पर पड़ी, जो नाव के माध्यम से आश्रयणी क्षेत्र के भीतर प्रवेश कर चुका था और जाल बिछाकर वन्यजीवों को फंसाने का प्रयास कर रहा था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही टीम ने उस व्यक्ति को रोका, वह मौके से भागने की कोशिश करने लगा। आरोपी ने नाव के जरिए तेजी से निकलने का प्रयास किया, लेकिन वनकर्मियों की तत्परता और रणनीतिक कार्रवाई के कारण उसे पकड़ लिया गया। इस पूरी कार्रवाई में टीम की सूझबूझ और सतर्कता की सराहना की जा रही है।
घटनास्थल से एक नाव और जाल बरामद किया गया, जिन्हें जब्त कर वन क्षेत्र कार्यालय, तालझारी लाया गया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी पहले भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में संगठित रूप से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें हो रही हैं, जिस पर अब सख्ती से अंकुश लगाने की आवश्यकता है।
वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अनाधिकृत प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व वन क्षेत्र पदाधिकारी पंचम दुबे द्वारा किया गया। उनके साथ प्रभारी वनपाल राणा रंजीत, प्रधान वनरक्षी अखिलेश मरांडी, प्रेम कुमार, पप्पू कुमार सहित अन्य वनकर्मी मौजूद थे। टीम के सभी सदस्यों ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि उधवा झील पक्षी आश्रयणी जैसे क्षेत्रों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाना है। हर साल हजारों की संख्या में विभिन्न देशों से पक्षी यहां आते हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। यदि ऐसे क्षेत्रों में अवैध शिकार और अतिक्रमण को नहीं रोका गया, तो इसका गंभीर प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।
वन विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय लोगों को यह समझाया जा सके कि वन्यजीवों की सुरक्षा क्यों जरूरी है। विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
यह घटना एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है कि अब वन विभाग पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अवैध गतिविधि को सख्ती से रोका जाएगा। आने वाले समय में ऐसे और भी अभियान चलाए जाने की संभावना है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
अंततः, यह कार्रवाई न केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी है, बल्कि यह संदेश भी है कि प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा के लिए कानून और प्रशासन दोनों पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उधवा झील जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।