पाकुड़: फतेहपुर प्रखंड के सिमलाडागल पंचायत अंतर्गत मुरीडीह शिव मंदिर परिसर में बाल विवाह रोकथाम को लेकर एक विशेष बैठक सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फतेहपुर के मुखिया एवं थाना प्रभारी अमर सिंह तापे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पंचायत सचिव विनायकांत झा, चंद्रशेखर यादव, पुजारी निताई चक्रवर्ती, समाजसेवी अरविंद मंडल, संजय मंडल, घनश्याम मंडल, भगवत प्रसाद मंडल, नकुल सोरेन, नवीन कुमार, बनवासी विकास आश्रम के जिला समन्वयक गोपी कुमार, जयप्रकाश मंडल, लालटू यादव सहित सेविकाएं एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
अक्षय तृतीया के मौके पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए बनवासी विकास आश्रम ने जिला प्रशासन के सहयोग से ‘सतर्कता दिवस’ भी मनाया। इस दौरान बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं बाल विवाह उन्मूलन का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) एवं आशा इकाइयों का भी सहयोग रहा। वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत नाबालिगों की शादी कराना दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल सभी लोग—परिजन, बाराती, कैटरर, डेकोरेटर, बैंड-बाजा संचालक, मैरेज हॉल मालिक और विवाह संपन्न कराने वाले पंडित या मौलवी—कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
संस्था के निदेशक सुरेश शक्ति ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पवित्र अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसी कुरीति को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से लोगों में समझ बढ़ी है और अब वे ऐसे मामलों की सूचना प्रशासन को दे रहे हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई हो रही है।
बनवासी विकास आश्रम द्वारा गांव-गांव में अभियान चलाकर हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई जा चुकी है। संस्था ने विश्वास जताया कि वर्ष 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क’ देशभर में 250 से अधिक संगठनों के साथ मिलकर 450 से अधिक जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है और अब तक पांच लाख से अधिक बाल विवाह रोकने में सफलता प्राप्त कर चुका है।