कोटालपोखर संवाददाता, महेशपुर:
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पाकुड़ जिला इकाई द्वारा रविवार को महेशपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास परिसर में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान जेपीएससी एवं जेएसएससी से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए परिषद के जिला संयोजक सन्नी तिवारी ने कहा कि एबीवीपी हमेशा से विद्यार्थियों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष करती रही है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर लगातार अनियमितताओं, कथित पेपर लीक और भ्रष्टाचार की चर्चाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के मन में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार से की प्रमुख मांगें
परिषद ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से मांग की कि परीक्षा से जुड़ी सभी शिकायतों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
विद्यार्थियों के अधिकारों पर जोर
महेशपुर नगर अध्यक्ष सरोज पांडे ने कहा कि निष्पक्ष और ईमानदार परीक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना सरकार और संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके और किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो।
गरीब और जनजातीय छात्रों की चिंता
जिला जनजातीय प्रमुख जॉन मरांडी ने कहा कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के कई विद्यार्थी सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली का पारदर्शी और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
परिषद का स्पष्ट रुख
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए परिषद पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एबीवीपी किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रही है। परिषद की मुख्य मांग निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
अंत में परिषद ने मीडिया से अपील की कि इस मुद्दे को केवल खबर के रूप में नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की भावनाओं से जुड़े विषय के रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि विद्यार्थियों की आवाज को मजबूती मिल सके।