कोटालपोखर संवाददाता, पाकुड़:
पश्चिम बंगाल से बिहार को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी मोरग्राम-किशनगंज हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना का प्रभाव अब पाकुड़ जिले में भी देखने को मिलेगा। इस परियोजना के तहत सदर प्रखंड के कुल 21 गांव प्रभावित होंगे। योजना को जमीन पर उतारने के लिए तकनीकी, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर उपायुक्त मेघा भारद्वाज और स्थानीय विधायक निशात आलम की मौजूदगी में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में एनएचएआई द्वारा नियुक्त परामर्शी संस्था एम/एस वायंट्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर के संभावित अलाइनमेंट, सड़क की तकनीकी संरचना, पुल-पुलिया निर्माण, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जानकारी के अनुसार, 244 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 13.83 किलोमीटर हिस्सा पाकुड़ जिले से होकर गुजरेगा।
21 गांव होंगे प्रभावित
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार झीकरहट्टी, फरसा, भवानीपुर, पृथ्वीनगर, चांचकी, चांदपुर, रामचंद्रपुर, किष्टोगोपालपुर, मलयपुर, गंधाईपुर, नवादा, इलामी, कुमारपुर, निहारपाड़ा, बड़ाधनसरिया, बोहरापोखर, किताझार, मरुआ पहाड़ी, साहापुर, पंचधाची एवं पितंबरा गांव इस परियोजना से प्रभावित होंगे।
जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देश
विधायक निशात आलम ने डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं और जनहित के पहलुओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण समेत सभी प्रक्रियाओं में प्रभावित ग्रामीणों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।
समन्वय से कार्य करने पर जोर
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने संबंधित विभागों को परियोजना से जुड़ी सभी आवश्यक सूचनाएं, अभिलेख और विभागीय प्रतिवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सक्रिय सहयोग पर बल दिया।
साथ ही डीसी ने भूमि अधिग्रहण, राजस्व, विद्युत, पेयजल, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े सुझाव समय पर देने के निर्देश दिए, ताकि परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत, व्यवहारिक और जनहितकारी स्वरूप दिया जा सके।