पाकुड़ (संवाददाता):
जिले में सरकारी विकास योजनाओं की रफ्तार लघु खनिजों के चालान की अनिवार्यता के कारण प्रभावित होती नजर आ रही है। मिट्टी, डस्ट, बालू, पत्थर डस्ट और ईंट जैसी निर्माण सामग्रियों के वैध चालान उपलब्ध नहीं होने से निर्माण कार्यों के साथ-साथ तैयार योजनाओं के भुगतान भी अटक गए हैं। इस समस्या को लेकर सोमवार को जिले के संवेदकों ने उपायुक्त मेघा भारद्वाज को ज्ञापन सौंपकर व्यावहारिक समाधान की मांग की।
संवेदकों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार सरकारी निर्माण कार्यों के बिलों का भुगतान तभी किया जा रहा है, जब उपयोग किए गए लघु खनिजों के चालान प्रस्तुत किए जाएं। लेकिन स्थानीय बाजार में इन सामग्रियों के वैध चालान उपलब्ध नहीं होने से सामग्री की आपूर्ति बाधित है और कई योजनाओं के बिल लंबित पड़े हैं। इससे संवेदकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है तथा मजदूरी, सामग्री आपूर्ति और अन्य खर्चों का भुगतान करना मुश्किल हो रहा है।
ज्ञापन में कहा गया कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो जिले की कई सरकारी विकास योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाएंगी, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और आम जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी होगी।
संवेदकों ने उपायुक्त से मांग की कि सरकारी निर्माण कार्यों में मिट्टी, डस्ट और ईंट जैसे लघु खनिजों के चालान जमा करने की अनिवार्यता में छूट अथवा शिथिलता प्रदान की जाए, ताकि निर्माण कार्य बिना बाधा जारी रह सकें और लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटारा हो सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में संवेदक उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। अब जिले के संवेदकों और संबंधित विभागों की निगाहें जिला प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।