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पाकुड़ रेलवे कॉलोनी मे पीने पानी के लिए मचा हाहाकार।

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पाकुड़ रेलवे कॉलोनी मे पीने पानी के लिए मचा हाहाकार।

पाकुड़ संवाददाता ।शहर के नई रेलवे कॉलोनी में रहने वाले हजारों रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल आज भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए पिछले 14 वर्षों से नगर परिषद, जिला प्रशासन और रेलवे के बीच पत्राचार,बैठकें और प्रस्तावों…

पाकुड़ रेलवे कॉलोनी मे पीने पानी के लिए मचा हाहाकार।
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पाकुड़ रेलवे कॉलोनी मे पीने पानी के लिए मचा हाहाकार।

पाकुड़ संवाददाता ।शहर के नई रेलवे कॉलोनी में रहने वाले हजारों रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल आज भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए पिछले 14 वर्षों से नगर परिषद, जिला प्रशासन और रेलवे के बीच पत्राचार,बैठकें और प्रस्तावों का दौर चल रहा है,लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2013 में ही पाकुड़ शहरी जलापूर्ति योजना के तहत रेलवे कॉलोनी को पेयजल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके लिए नई रेलवे कॉलोनी स्थित रेलवे भूमि पर ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन और अन्य आवश्यक संरचनाओं के निर्माण की योजना बनाई गई थी। जिला प्रशासन और नगर परिषद ने कई बार रेलवे से भूमि उपयोग के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) मांगा,लेकिन आज तक यह मामला फाइलों में ही उलझा हुआ है।

हजारों लोग प्रभावित—

जानकारी के अनुसार पाकुड़ में लगभग एक हजार रेलवे कर्मचारी कार्यरत हैं और करीब 150 रेलवे क्वार्टर मौजूद हैं। इसके अलावा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान और उनके परिवार भी इसी क्षेत्र में निवास करते हैं। रेलवे परिसर में मौजूद अधिकांश बोरवेल खराब स्थिति में हैं,जिसके कारण लोगों को हर तीन-चार दिन पर जल संकट का सामना करना पड़ता है।

टैंकर बना अस्थायी सहारा-—

बीते वर्षों में रेलवे कॉलोनी,स्टेशन और सार्वजनिक शौचालयों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया गया,लेकिन यह केवल अस्थायी व्यवस्था साबित हुई।स्थायी समाधान के लिए नगर परिषद ने रेलवे कॉलोनी को शहरी जलापूर्ति योजना से जोड़ने का प्रस्ताव दिया,जिस पर विभिन्न स्तरों पर सहमति भी बनी थी।

रेलवे पर टालमटोल का आरोप–

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद रेलवे विभाग एनओसी जारी करने के मामले में टालमटोल की नीति अपना रहा है।यदि समय पर अनुमति मिल जाती तो वर्षों पहले ही रेलवे कॉलोनी के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकता था।

वार्ड 11, 12 और 17 भी प्रभावित—

नगर परिषद के दस्तावेजों के अनुसार रेलवे भूमि पर ओवरहेड टैंक का निर्माण नहीं होने से केवल रेलवे कॉलोनी ही नहीं,बल्कि उससे जुड़े वार्ड संख्या 11, 12 और 17 के लोगों को भी जलापूर्ति योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नई उपायुक्त से जगी उम्मीद–

वर्षों से लंबित इस समस्या के समाधान को लेकर अब लोगों की निगाहें जिले की नई उपायुक्त मेघा भारद्वाज पर टिकी हुई हैं। स्थानीय नागरिकों और रेलवे कॉलोनी के निवासियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन की पहल से रेलवे और नगर परिषद के बीच समन्वय स्थापित होगा तथा एनओसी की बाधा दूर कर जल्द ही पेयजल योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।

जनता का सवाल—

आखिर 14 वर्षों से चल रही रेलवे द्वारा टाल मटोल की नीति के कारण इस योजना का लाभ लोगों तक कब पहुंचेगा? क्या रेलवे और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर हजारों लोगों को पेयजल संकट से मुक्ति दिलाई जा सकेगी? यह सवाल आज भी रेलवे कॉलोनी के हर घर में गूंज रहा है।पानी जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता है,लेकिन पाकुड़ की नई रेलवे कॉलोनी में यह आवश्यकता आज भी एक अधूरा सपना बनी हुई है।

पेयजल योजना के लिए रेलवे भूमि बनी अड़चन, बोर्ड बैठक में वार्ड पार्षद निभा देवी ने उठाया मुद्दा

पाकुड़-शहर में पेयजल संकट और शहरी जलापूर्ति योजना के अधूरे कार्य को लेकर वार्ड पार्षद निभा देवी ने नगर परिषद बोर्ड की बैठक में गंभीरता से मामला उठाया।उन्होंने कहा कि रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में ओवरहेड टैंक निर्माण और जलापूर्ति पाइप बिछाने का कार्य रेलवे की जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबित है,जिससे स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों को शुद्ध पेयजल का लाभ नहीं मिल पा रहा है।मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने पूर्व रेलवे,हावड़ा मंडल से पत्राचार कर रेलवे भूमि उपयोग के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) देने का अनुरोध किया हैं। इसके जवाब में रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेलवे भूमि को सीधे उपलब्ध कराने के बजाय नगर परिषद को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भूमि लीज या लाइसेंस पर लेने के लिए आवेदन करना होगा। रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता (चतुर्थ) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए रेलवे भूमि के लाइसेंस/लीज संबंधी सभी आवेदन IR-LSPS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। साथ ही रेलवे ने यह भी बताया कि भूमि के प्रचलित बाजार मूल्य का 1.5 प्रतिशत वार्षिक शुल्क तथा प्रत्येक वर्ष 6 प्रतिशत की वृद्धि लागू होगी।रेलवे के इस जवाब के बाद अब नगर परिषद को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क जमा करना होगा।
वार्ड पार्षद निभा देवी ने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने नगर परिषद प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने की मांग की,ताकि लोगों को जल्द से जल्द पेयजल योजना का लाभ मिल सके।

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