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झुमरा पहाड़:जहां गोलियों की गूंज थी, अब विकास की रफ्तार है – 10 साल में बदली तस्वीर, सड़कें बनीं तरक्की की नई इबारत

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झुमरा पहाड़:जहां गोलियों की गूंज थी, अब विकास की रफ्तार है – 10 साल में बदली तस्वीर, सड़कें बनीं तरक्की की नई इबारत

झुमरा पहाड़ का बदला चेहरा: नक्सल प्रभावित इलाके से विकास मॉडल तक, 10 साल में आई क्रांति झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित झुमरा पहाड़, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ था, अब विकास की मिसाल बन चुका है। जानिए कैसे सड़क, सुरक्षा और सरकारी पहल ने बदल दी तस्वीर। परिचय: खौफ से…

झुमरा पहाड़:जहां गोलियों की गूंज थी, अब विकास की रफ्तार है – 10 साल में बदली तस्वीर, सड़कें बनीं तरक्की की नई इबारत
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झुमरा पहाड़:जहां गोलियों की गूंज थी, अब विकास की रफ्तार है – 10 साल में बदली तस्वीर, सड़कें बनीं तरक्की की नई इबारत

झुमरा पहाड़ का बदला चेहरा: नक्सल प्रभावित इलाके से विकास मॉडल तक, 10 साल में आई क्रांति

झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित झुमरा पहाड़, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ था, अब विकास की मिसाल बन चुका है। जानिए कैसे सड़क, सुरक्षा और सरकारी पहल ने बदल दी तस्वीर।

परिचय: खौफ से उम्मीद तक की कहानी

झारखंड के झुमरा पहाड़ की पहचान कभी गोलियों की गूंज और नक्सल गतिविधियों से होती थी। लेकिन आज वही क्षेत्र विकास, शांति और तरक्की का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

गोमिया प्रखंड के इस दुर्गम इलाके में कभी लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी सपना थीं। दिन में निकलना खतरे से खाली नहीं था, और पगडंडियों पर जंगली जानवरों के साथ-साथ नक्सलियों का डर भी बना रहता था।

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आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। सड़कें बन गई हैं, परिवहन सुविधा उपलब्ध है और लोग बिना डर के अपने रोजमर्रा के काम कर रहे हैं।

बदलाव की शुरुआत: सुरक्षा और रणनीति

झुमरा पहाड़ में बदलाव की असली शुरुआत तब हुई जब सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। वर्ष 2005-06 के दौरान केदला, रहावन, चतरोचट्टी और कोनार डैम जैसे क्षेत्रों में CRPF कैंप स्थापित किए गए।

CRPF और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान ने धीरे-धीरे नक्सलियों की पकड़ कमजोर कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 10 वर्षों में यहां एक भी बड़ी नक्सली घटना दर्ज नहीं हुई।

सड़क बनी विकास की रीढ़

झुमरा पहाड़ के विकास में सबसे अहम भूमिका सड़क निर्माण ने निभाई। रहावन से झुमरा पहाड़ तक 10 किलोमीटर लंबी सड़क लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई।

इसके बाद तिसकोपी और अमन जैसे क्षेत्रों तक भी सड़क पहुंची। अब यहां से बसें, ट्रेकर और निजी वाहन आसानी से गुजरते हैं।

सड़क निर्माण ने न सिर्फ आवाजाही आसान की, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी खोले।

प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाएं

झुमरा पहाड़ और इसके आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। पास में स्थित लुगू पहाड़ और आसपास के जंगल इस क्षेत्र को पर्यटन के लिए भी उपयुक्त बनाते हैं।

अगर सरकार यहां पर्यटन को बढ़ावा दे, तो यह क्षेत्र आने वाले समय में झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है।

राजनीतिक पहल से मिली गति

वर्ष 2013 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने झुमरा पहाड़ का दौरा किया था।

उनके साथ पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह भी मौजूद थे। इस दौरे के बाद यहां विकास कार्यों में तेजी आई।

सरकार ने सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया, जिससे क्षेत्र की तस्वीर बदलने लगी।

ग्रामीणों की राय: डर से भरोसे तक

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले यहां डर का माहौल था। लोग अपनी बेटियों की शादी तक करने से डरते थे।

आज हालात बदल चुके हैं। बच्चे स्कूल जा रहे हैं, लोग रोजगार के लिए बाहर जा रहे हैं और महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।

कुछ ग्रामीण यह भी मानते हैं कि नक्सल गतिविधियों के कारण ही सरकार का ध्यान इस क्षेत्र पर गया, जिससे विकास संभव हो सका।

वर्तमान स्थिति: तेजी से आगे बढ़ता झुमरा

आज झुमरा पहाड़ के गांवों में पुल, सड़क, पेयजल और अन्य विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं।

प्रशासन का फोकस अब इस क्षेत्र को पूरी तरह से विकसित करने और इसे एक मॉडल क्षेत्र के रूप में स्थापित करने पर है।

बदलाव की मिसाल बना झुमरा

झुमरा पहाड़ की कहानी यह साबित करती है कि सही रणनीति, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है।

यह सिर्फ एक इलाके का बदलाव नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि विकास और शांति साथ-साथ चल सकते हैं।

जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, आज वहां बसों के हॉर्न और बच्चों की हंसी सुनाई देती है।

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