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गढ़वा: विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में 'जल जागरूकता' संगोष्ठी का आयोजन

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गढ़वा: विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में ‘जल जागरूकता’ संगोष्ठी का आयोजन

अनूप कुमार गुप्ता, गढ़वा। विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में ‘जल जागरुकता’ संगोष्ठी का आयोजन 22 मार्च को किया गया। इस संगोष्ठी में स्थानीय प्रबुद्ध जनों, समाजसेवी कार्यकर्ता एवं पर्यावरण प्रेमियों ने जल संरक्षण की दिशा में अपने-अपने विचार रखे। सभी ने एक मत से कहा कि गढ़वा में भविष्य का जल संकट दस्तक…

गढ़वा: विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में 'जल जागरूकता' संगोष्ठी का आयोजन
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गढ़वा: विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में 'जल जागरूकता' संगोष्ठी का आयोजन

अनूप कुमार गुप्ता,

गढ़वा। विश्व जल दिवस पर अनुमंडल कार्यालय में ‘जल जागरुकता’ संगोष्ठी का आयोजन 22 मार्च को किया गया। इस संगोष्ठी में स्थानीय प्रबुद्ध जनों, समाजसेवी कार्यकर्ता एवं पर्यावरण प्रेमियों ने जल संरक्षण की दिशा में अपने-अपने विचार रखे। सभी ने एक मत से कहा कि गढ़वा में भविष्य का जल संकट दस्तक दे रहा है, इसलिए अभी से चेतने की जरूरत है। मौके पर जल संरक्षण, जल संचयन एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए सामूहिक शपथ ली।

संगोष्ठी के दौरान सांसद प्रतिनिधि प्रमोद कुमार चौबे ने कहा कि भूमि संरक्षण विभाग, मनरेगा, वन विभाग आदि की मदद से जल संरक्षण के लिए बहुत सारे उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि इनकी व्यावहारिक सफलता तब होगी, जब प्रशासन और नागरिक भी उतनी ही संजीदगी से सोंचे। उन्होंने पॉलिथीन को भी जल संकट के लिए जिम्मेदार बताया। इस पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए।

समाजसेवी दिवाकर तिवारी ने कहा कि गढ़वा क्षेत्र में अलग-अलग इलाकों की भूगर्भीय स्थिति अलग-अलग है। इसलिए गढ़वा के अलग-अलग क्षेत्र के लिए जल संरक्षण के उपाय एवं जागरुकता कार्यक्रम भी अलग-अलग होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति ज्यादा भयावह है। वहां प्राथमिकता से अभियान की आवश्यकता है।

पूर्व पार्षद जितेंद्र सिन्‍हा ने कहा कि गढ़वा में 90% जल जरूरतें नदी स्रोतों से ही पूरी होती रही हैं। इसलिए नदी संरक्षण बहुत जरूरी है। पानी की चिंता करना केवल प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति का की मौलिक जिम्मेदारी है। इसलिए हम सभी को अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता अजय उपाध्याय ने कहा कि जल की प्रवृत्ति तो स्वत: बहने की है, किंतु उसे रोकने और बांधने के लिए मानवीय प्रयासों की जरूरत है। इसके लिए हमें पौधरोपण को बढ़ावा देना होगा।

शिक्षाविद उमेश सहाय ने कहा कि पानी बचाना ना केवल मानव जीवन के लिए जरूरी है, बल्कि प्रत्येक जीव के अस्तित्व के लिए जरूरी है। उन्होंने नदियों को अविरल बहते रहने के लिए कारगर उपाय के साथ-साथ तालाब क्रांति की जरूरत पर जोर दिया।

शिक्षक नितिन तिवारी ने कहा कि सरिता है तो सभ्यता है। इसलिए नदियों को कचरा और अतिक्रमण से मुक्ति दिलाई जाए। पानी का अनुशासित प्रयोग कैसे करें, इस बारे में बच्चों को बताया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनें। उन्होंने तालाबों की सिल्ट की समय समय पर हटवाने का सुझाव दिया।

एडवोकेट राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पानी का उपयोग कम नहीं कर सकते हैं, लेकिन इसका सदुपयोग जरूर हमारे हाथ में है। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करने के लिए सुझाव दिया।

समाजसेवी पंकज चौबे ने कहा कि नदियों के इर्द-गिर्द बालू का संरक्षण बहुत जरूरी है, क्योंकि बालू की मौजूदगी ही नदियों के जलस्तर को बरकरार रखती है। उन्होंने गांव गांव टोलियां बनाकर जल जागरुकता फैलाने की वकालत की।

व्यवसायी अरविंद गुप्ता, गौतम ऋषि, बृजमोहन प्रसाद, आनंद गुप्ता, ज्योतिष पांडे, देवराज उपाध्याय, आनंद दुबे आदि ने भी अपने विचार रखते हुए सोखता निर्माण, डोभा निर्माण, वर्षा जल संचयन, पौधरोपण आदि सुझाव दिए।

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