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आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

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आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

मिशन बदलाव टीम बोलबा प्रखंड के पंचायत मालसड़ा के जेठूबांधगावं पहुँच, ग्रामीणों संग की बैठक एकतरफ देशभर में आजादी के 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्‌य में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है वहीं आज भी सिमड़ेगा जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां के वाशिंदे मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं . बैठक में…

आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण
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मिशन बदलाव टीम बोलबा प्रखंड के पंचायत मालसड़ा के जेठूबांधगावं पहुँच, ग्रामीणों संग की बैठक

एकतरफ देशभर में आजादी के 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्‌य में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है वहीं आज भी सिमड़ेगा जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां के वाशिंदे मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं . बैठक में मिशन बदलाव को बोलबा प्रखंड के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया।

आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

बोलबा प्रखंड के बैंक ऑफ इंडिया शाखा में खाताधारकों के खाते से धन की हेर फेर और शाखा प्रबंधक द्वारा आदिवासी महिला ग्राहकों से की जा रही बदतमीजी और दुर्भावना से की जा रही जातीय टिप्पणी का मामला प्रकाश में आया है।ग्रामीणों के अनुसार यहां खाते को अपडेट करने की कोई मशीन काम नहीं कर रही है

ग्रामीणों ने बताया कि

यहां सुलभ जीवनयापन के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री के संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद यहां न तो पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता के लिए कोई सरकारी योजना संचालित है, न ही गांव से शहर की ओर जाने के लिए पक्का मार्ग ही यहां निर्मित हो सका है। यदि किसी घर में कोई बीमार पड़ जाए तो यहां पर एंबुलेंस आदि का आना नामुमकिन है। गत वर्ष हुए वज्रपात से मृत मवेशियों का मुआवजा भी गरीब ग्रामीणों को अभी तक नहीं मिल पाया है जबकि प्रशासन मौके पर पहुंचकर जांच कर चुका है ।मिशन बदलाव के भूषन भगत ने कहा कि सरकार द्वारा दर्जनों योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। ग्राम विकास के दावे किए जा रहे हैं लेकिन इसका लाभ भी ग्रामीण समुदाय के लोगों को नहीं मिला है एवं भीषण गर्मी के चलते यहां पर गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में चापानल हैं लेकिन वह सभी हवा उगल रहे हैं। पहाड़ी अंचल होने के कारण यहां का भू जलस्तर गर्मी शुरू होने के पूर्व ही बहुत नीचे चला जाता है और ग्रामीण बताते हैं कि पानी की उपलब्धता के लिए वे गांव में खुदे एक कुएं पर निर्भर हैं। पुरुष-महिलाएं, बच्चे आदि सभी सुबह-शाम इसी कुएं पर पहुंचकर पीने व निस्तार के लिए पानी जुटाते हैं, यहां पर पानी का संकट विकराल रूप धारण किए है,मिशन बदलाव के पंकज चंद गोस्वामी ने कहा कि अभी भी बोलबा क्षेत्र के ग्रामीण सड़क पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, आदिवासी कल्याण की योजनाएं यहां अब तक नहीं पहुंच सकी हैं। सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चियों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है .मिशन बदलाव के अविनाश नायक और प्रणव प्रताप सिंह ने कहा कि ग्रामीणों को बैंक में आ रही समस्याओं के लिए बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों और जिला प्रशासन को अवगत कराया जायेगा।आज की बैठक में मिशन बदलाव सदस्य गोपाल सेनापति,प्रफुल्ल सोरेंग,अनूप, और ग्रामीण उपस्थित थे

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8 responses to “आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण”

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