अनिकेत तिवारी, पाकुड़ संवाददाता
पाकुड़। रेलवे द्वारा जारी विवरण के अनुसार वर्ष 1860 में ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा राजमहल तक रेललाइन पहुंचने के साथ ही मालपहाड़ी क्षेत्र के उच्च गुणवत्ता वाले पत्थरों की रेलमार्ग से ढुलाई शुरू हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे पाकुड़ देश के प्रमुख स्टोन उत्पादन क्षेत्रों में शामिल हो गया और यहां से रेलवे लाइन, पुल, सड़क, बांध तथा अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर पत्थरों की आपूर्ति होने लगी।
बढ़ती माल ढुलाई के साथ पाकुड़ मालपहाड़ी स्टोन क्वारी रेलवे साइडिंग पूर्व रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण माल लोडिंग केंद्रों में शुमार हो गई। लगातार बढ़ते दबाव के कारण वर्षों पुरानी साइडिंग की क्षमता आधुनिक जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गई थी।
इसी चुनौती को देखते हुए वर्ष 2025 में पूर्व रेलवे, हावड़ा के महाप्रबंधक मिलिंद के. देऊसकर ने इसके व्यापक पुनर्विकास की परिकल्पना की। उनके मार्गदर्शन में हावड़ा मंडल ने योजनाबद्ध तरीके से साइडिंग का आधुनिकीकरण किया, जो जुलाई 2026 में पूरा हुआ।
परियोजना के तहत ट्रैक व्यवस्था, लोडिंग प्रणाली और परिचालन प्रक्रिया को आधुनिक बनाया गया है, जिससे मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित होगी। रेलवे के अनुसार नई व्यवस्था से स्टोन लोडिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा रैक की प्लेसमेंट और निकासी पहले की तुलना में अधिक तेजी से संभव हो सकेगी।
महाप्रबंधक ने कहा कि यह परियोजना केवल रेलवे साइडिंग का नवीनीकरण नहीं, बल्कि पाकुड़ की ऐतिहासिक औद्योगिक विरासत को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुरक्षित और सशक्त बनाने का प्रयास है।
इस आधुनिकीकरण से पूर्व रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि होगी और देशभर में निर्माण कार्यों के लिए पाकुड़ के पत्थरों की आपूर्ति और अधिक सुगम हो सकेगी।
इस परियोजना को सफल बनाने में सीनियर डिविजनल इंजीनियर-4 अनिल करवा, सहायक मंडल अभियंता प्रकाश कुमार, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (परमानेंट वे) उज्ज्वल कुमार, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स) परितोष रंजन सहित हावड़ा मंडल के अधिकारियों, अभियंताओं, पर्यवेक्षकों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।