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₹1200 किलो बिकने वाली इस सब्जी के आगे फेल है चिकन-मटन, स्वाद के साथ सेहत का खजाना है.. झारखंड में ‘पुटु’

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₹1200 किलो बिकने वाली इस सब्जी के आगे फेल है चिकन-मटन, स्वाद के साथ सेहत का खजाना है.. झारखंड में ‘पुटु’

झारखंड के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में प्रकृति ने कई अनमोल खजाने छुपा रखे हैं। इन्हीं में से एक है ‘कटरुआ’, जिसे स्थानीय भाषा में ‘पुटु’ कहा जाता है। यह कोई साधारण सब्जी नहीं, बल्कि एक दुर्लभ जंगली मशरूम है, जिसकी बाजार में कीमत करीब ₹1000 से ₹1200 प्रति किलो तक पहुंच जाती है।…

₹1200 किलो बिकने वाली इस सब्जी के आगे फेल है चिकन-मटन, स्वाद के साथ सेहत का खजाना है.. झारखंड में ‘पुटु’
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झारखंड के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में प्रकृति ने कई अनमोल खजाने छुपा रखे हैं। इन्हीं में से एक है ‘कटरुआ’, जिसे स्थानीय भाषा में ‘पुटु’ कहा जाता है। यह कोई साधारण सब्जी नहीं, बल्कि एक दुर्लभ जंगली मशरूम है, जिसकी बाजार में कीमत करीब ₹1000 से ₹1200 प्रति किलो तक पहुंच जाती है। अपनी खास खुशबू, बेहतरीन स्वाद और औषधीय गुणों के कारण यह चिकन-मटन जैसी महंगी चीजों को भी पीछे छोड़ देता है।

क्या है कटरुआ (पुटु)?

₹1200 किलो बिकने वाली इस सब्जी के आगे फेल है चिकन-मटन, स्वाद के साथ सेहत का खजाना है.. झारखंड में ‘पुटु’


कटरुआ दरअसल एक प्रकार का जंगली मशरूम है, जो खासतौर पर मानसून के मौसम में उगता है। यह झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसे कृत्रिम रूप से उगाना बेहद कठिन माना जाता है, इसलिए इसकी उपलब्धता सीमित होती है और यही वजह है कि इसकी कीमत इतनी अधिक होती है।

पुटु जमीन के अंदर उगता है और इसे ढूंढना किसी खजाने की खोज से कम नहीं होता। ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग सुबह-सुबह जंगलों में जाकर इसे खोजते हैं। कई बार इसके लिए विशेष अनुभव और पहचान की जरूरत होती है, क्योंकि हर मशरूम खाने योग्य नहीं होता।

स्वाद में क्यों खास है पुटु?


पुटु का स्वाद बेहद लाजवाब और अलग होता है। इसे खाने वाले बताते हैं कि इसका स्वाद चिकन और मटन से भी ज्यादा बेहतर और प्राकृतिक होता है। इसमें एक खास तरह की मिट्टी की खुशबू और ताजगी होती है, जो इसे और भी खास बनाती है। इसे आमतौर पर भूनकर, मसाले के साथ पकाकर या चटनी के रूप में भी खाया जाता है।

गांवों में जब पुटु मिलता है तो इसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। परिवार और पड़ोसी मिलकर इसे पकाते हैं और इसका आनंद लेते हैं।

कीमत इतनी ज्यादा क्यों?

₹1200 किलो बिकने वाली इस सब्जी के आगे फेल है चिकन-मटन, स्वाद के साथ सेहत का खजाना है.. झारखंड में ‘पुटु’


कटरुआ की कीमत ₹1200 प्रति किलो तक पहुंचने के पीछे कई कारण हैं। पहला, यह केवल साल में कुछ ही दिनों के लिए उपलब्ध होता है। दूसरा, इसे उगाया नहीं जा सकता, बल्कि केवल जंगलों से ही प्राप्त किया जाता है। तीसरा, इसे ढूंढना काफी मुश्किल होता है और इसमें समय व मेहनत लगती है।

इसके अलावा, बाजार में इसकी मांग काफी ज्यादा है। शहरों में भी अब लोग इसकी खासियत जानने लगे हैं, जिससे इसकी कीमत और बढ़ जाती है।

सेहत के लिए वरदान


कटरुआ केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करता है और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

स्थानीय लोग इसे प्राकृतिक दवा के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। माना जाता है कि यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। कुछ शोधों में यह भी सामने आया है कि जंगली मशरूम में कैंसर-रोधी गुण भी हो सकते हैं।

आदिवासी जीवन से जुड़ा खास रिश्ता


कटरुआ का आदिवासी संस्कृति से गहरा संबंध है। यह उनके भोजन का अहम हिस्सा होने के साथ-साथ उनकी आजीविका का भी साधन है। बारिश के मौसम में कई परिवार जंगल से पुटु इकट्ठा कर बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है।

यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसमें जंगल की गहरी समझ और अनुभव की जरूरत होती है। बच्चे भी अपने बुजुर्गों से यह कला सीखते हैं।

सावधानी भी जरूरी


हालांकि कटरुआ बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसे पहचानना बहुत जरूरी है। जंगल में कई प्रकार के मशरूम उगते हैं, जिनमें से कुछ जहरीले भी हो सकते हैं। इसलिए केवल अनुभवी लोगों द्वारा पहचाने गए पुटु का ही सेवन करना चाहिए।

इसके अलावा, इसे ताजा ही खाना बेहतर होता है, क्योंकि ज्यादा समय तक रखने पर इसका स्वाद और गुणवत्ता कम हो सकती है।

बढ़ती लोकप्रियता


अब पुटु की लोकप्रियता केवल गांवों तक सीमित नहीं रही। बड़े शहरों के लोग भी इसे खरीदने के लिए उत्सुक रहते हैं। कुछ जगहों पर इसे विशेष व्यंजन के रूप में रेस्तरां में भी परोसा जाने लगा है।

सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए इसकी जानकारी तेजी से फैल रही है, जिससे इसकी मांग और बढ़ रही है। यही कारण है कि आने वाले समय में इसकी कीमत और भी बढ़ सकती है।


कटरुआ या पुटु केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि प्रकृति का अनमोल उपहार है। इसका स्वाद, पौष्टिकता और दुर्लभता इसे खास बनाते हैं। यह न केवल झारखंड की पहचान है, बल्कि वहां के आदिवासी जीवन और संस्कृति का भी अभिन्न हिस्सा है।

अगर आपको कभी पुटु खाने का मौका मिले, तो इसे जरूर आजमाएं। यह अनुभव न केवल आपके स्वाद को एक नया आयाम देगा, बल्कि आपको प्रकृति के और करीब भी ले जाएगा।

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