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जापानी इंसेफेलाइटिस व वेक्टर जनित रोगों पर नियंत्रण के लिए पाकुड़ में प्रशिक्षण आयोजित

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जापानी इंसेफेलाइटिस व वेक्टर जनित रोगों पर नियंत्रण के लिए पाकुड़ में प्रशिक्षण आयोजित

पाकुड़। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सदर अस्पताल, पाकुड़ के सभागार में एक दिवसीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. एस. के. मिश्रा ने की, जबकि जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी…

जापानी इंसेफेलाइटिस व वेक्टर जनित रोगों पर नियंत्रण के लिए पाकुड़ में प्रशिक्षण आयोजित
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पाकुड़। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सदर अस्पताल, पाकुड़ के सभागार में एक दिवसीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. एस. के. मिश्रा ने की, जबकि जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार की उपस्थिति में प्रशिक्षण संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. एस. के. मिश्रा ने कहा कि जापानी इंसेफेलाइटिस सहित सभी वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए समय पर पहचान, त्वरित उपचार, प्रभावी निगरानी और व्यापक जन-जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान इन रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में सभी स्वास्थ्यकर्मियों को क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतते हुए सर्विलांस, निगरानी एवं नियंत्रण गतिविधियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ संचालित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता प्रत्येक संभावित मरीज तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और किसी भी परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना है।

जापानी इंसेफेलाइटिस व वेक्टर जनित रोगों पर नियंत्रण के लिए पाकुड़ में प्रशिक्षण आयोजित

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान जापानी इंसेफेलाइटिस के संक्रमण, लक्षण, बचाव, उपचार, रोग निगरानी एवं नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जिले में कालाजार, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए सक्रिय रोगी खोज, समय पर जांच, गुणवत्तापूर्ण उपचार, प्रभावी वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों तथा सामुदायिक सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता और आमजन की भागीदारी से इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने जापानी इंसेफेलाइटिस एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, नियंत्रण तथा फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता में वृद्धि करते हुए जिले में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण गतिविधियों को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना बताया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के चिकित्सा पदाधिकारी, जिला वीबीडी परामर्शदाता अंकित कुमार, फाइनेंस एंड लॉजिस्टिक असिस्टेंट (एफएलए) राजू अग्रवाल, एमटीएस, केटीएस, एमपीडब्ल्यू, सीएचओ, एएनएम सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया।

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