रांची में रिक्शा चलाकर गुजारा कर रहे थे, वीडियो वायरल होने पर मिली मदद
घाघरा (गुमला), 1 जुलाई
खबर:
घाघरा प्रखंड के लगभग 65 वर्षीय किशुन भगत की जिंदगी में उनकी बांसुरी की धुन ने नया मोड़ ला दिया है। वर्षों से रांची में रिक्शा चलाकर गुजर-बसर कर रहे किशुन अब प्रशासन की नजर में आए हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है।
बताया जाता है कि 1970 के दशक के उत्तरार्ध में आर्थिक तंगी के कारण किशुन भगत अपने गांव से रांची चले गए थे। वहां कडरू ओवरब्रिज के नीचे रहकर वे रिक्शा चलाते थे और खाली समय में बांसुरी बजाकर लोगों का मन मोह लेते थे। उनकी सादगी और कला ने राहगीरों को हमेशा आकर्षित किया।
इसी दौरान एक पत्रकार की नजर उन पर पड़ी, जब वे रिक्शा में बैठकर बांसुरी बजा रहे थे। पत्रकार ने उनका वीडियो बनाकर प्रसारित किया, जो बाद में प्रशासन तक पहुंचा। वीडियो देखने के बाद घाघरा प्रखंड के अंचल अधिकारी सुशील कुमार ने मामले को संज्ञान में लिया और स्थानीय समाजसेवी गौरी शंकर साहू को किशुन भगत को रांची से गांव लाने की जिम्मेदारी सौंपी।
समाजसेवी द्वारा उन्हें सुरक्षित गांव लाया गया, जहां अंचल अधिकारी ने उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन किया। तत्पश्चात उन्हें पेंशन योजना का लाभ दिलाया गया और आवास योजना के तहत जल्द सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
घाघरा प्रखंड कार्यालय पहुंचने पर जब लोगों के आग्रह पर किशुन भगत ने बांसुरी बजाई, तो वहां मौजूद लोग उनकी मधुर धुन से मंत्रमुग्ध हो गए। कई लोगों ने इस क्षण को अपने मोबाइल में कैद किया और उनकी कला की सराहना की।
पूर्व मुख्यमंत्री से मिलती-जुलती शक्ल बनी पहचान
किशुन भगत की एक खास पहचान यह भी है कि उनका चेहरा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से काफी मिलता-जुलता है। रांची में लोग उन्हें प्यार से “चम्पई दा” कहकर भी पुकारते हैं।
यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और कला कभी व्यर्थ नहीं जाती—जरूरत सिर्फ एक मौके और सही पहचान की होती है।