50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ तीन दिवसीय समर कैंप का भव्य समापन
रांची: स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड के अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा राज्यभर के सभी कोटि के सरकारी विद्यालयों में आयोजित तीन दिवसीय “समर कैंप 2026” का गुरुवार को सफल और उत्साहपूर्ण समापन हुआ। “सीखें, खेलें, सृजन करें” थीम पर आधारित इस विशेष आयोजन ने शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे अनुभव, अभिव्यक्ति और सहभागिता से जोड़ने का एक जीवंत प्रयास प्रस्तुत किया।
राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित इस समर कैंप में लगभग 35 हजार विद्यालयों के 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। यह व्यापक सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। तीन दिनों तक विद्यालय परिसर खेल, कला, संस्कृति, योग और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जीवंत बने रहे, जिससे बच्चों को सीखने का एक नया और आनंददायक अनुभव प्राप्त हुआ।
समर कैंप के दौरान छोटे-छोटे बच्चों से लेकर किशोर विद्यार्थियों तक सभी ने अपनी-अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार गतिविधियों में हिस्सा लिया। कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए जूम्बा व्यायाम, कंचे का खेल, कविता पाठ, नृत्य तथा “मेरा विद्यालय, मेरा गाँव” विषय पर लघु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता और समूह में काम करने की भावना विकसित हुई। इसके साथ ही चित्रांकन और रंग भरने जैसी हस्तकला गतिविधियों ने उनकी कल्पनाशक्ति और सृजनात्मकता को नया आयाम दिया।
कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए गिल्ली-डंडा, पिट्टू और गुलेल जैसे पारंपरिक स्वदेशी खेलों का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इन खेलों ने बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ शारीरिक विकास और टीम भावना को भी प्रोत्साहित किया। इसके अलावा “झारखंड की संस्कृति, वन का लाभ” विषय पर भाषण प्रतियोगिता तथा सामान्य ज्ञान आधारित क्वीज ने विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहानी लेखन, पुस्तक पठन, लोकगीत और क्षेत्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
वहीं कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए “झारखंड का विकास, पर्यावरण का संरक्षण” जैसे समसामयिक विषयों पर भाषण और क्वीज प्रतियोगिता आयोजित की गई। समूह प्रस्तुति, नाटक, लोकगीत और क्षेत्रीय नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया।
समर कैंप के अंतिम दिन कई जिलों में जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों का दौरा कर विद्यार्थियों के साथ योग अभ्यास और सामूहिक नृत्य में भाग लिया। अधिकारियों की उपस्थिति से बच्चों में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया, जिससे उनमें प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता की भावना को प्रोत्साहन मिला।
इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी श्री धीरसेन ए. सोरेंग ने कहा कि यह समर कैंप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और रचनात्मक ज्ञान प्रदान करते हैं, जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालय परिवर्तन करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह समर कैंप विशेष रूप से उपयोगी साबित हुआ है। इसके माध्यम से वे नए वातावरण, नए मित्रों और नए शिक्षकों के साथ सहज रूप से जुड़ सके, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास और सामंजस्य की भावना विकसित हुई।
समर कैंप 2026 ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षा को आनंद, रचनात्मकता और सहभागिता के साथ जोड़ा जाए, तो विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। यह पहल न केवल बच्चों के शैक्षणिक विकास में सहायक रही, बल्कि उन्हें जीवन कौशल, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से भी समृद्ध करने में सफल रही।
अंततः, यह आयोजन झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है और भविष्य में ऐसे और नवाचारों की संभावनाओं को मजबूत करता है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की यह पहल निश्चित रूप से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।