कुमार प्रसान्त
गोमिया: Central Coalfields Limited (सीसीएल) के कथारा एरिया अंतर्गत स्वांग-गोविंदपुर परियोजना में इन दिनों कोल स्टॉक से बड़े पैमाने पर कोयला चोरी का मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि आपसी मिलीभगत और कथित “सेटिंग” के जरिए रात के अंधेरे में सैकड़ों की संख्या में कोयला चोर वहां पहुंचते हैं और हॉलपेक से गिराए गए कोयले को बाइकों पर लादकर आसानी से ले जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार के कारण कंपनी को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बताया जाता है कि दिन के समय, जब लोकल सेल के वाहनों को कोयला उपलब्ध कराना होता है, तब कोल स्टॉक में केवल खानापूर्ति के तौर पर कुछ हॉलपेक कोयला गिराया जाता है, जिसमें अधिकतर चूरा होता है। वहीं शाम ढलते ही जब बड़ी संख्या में कोयला चोर बाइकों के साथ वहां डेरा डाल देते हैं, तब अच्छी गुणवत्ता वाला ‘स्टीम कोयला’ गिराया जाता है, जिसे बोरे में भरकर ले जाना आसान होता है।
हैरानी की बात यह है कि कोल स्टॉक तक पहुंचने वाले दोनों रास्तों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, इसके बावजूद रात भर कोयला चोरों की आवाजाही जारी रहती है। आरोप है कि सुरक्षा विभाग इस पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता निभा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार सुरक्षा गार्ड अक्सर चोरी की सूचना स्थानीय थाने में दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। इस मामले में सुरक्षा इंचार्ज नुरुल होदा और प्रदीप महतो की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि सुरक्षा इंचार्ज नुरुल होदा का कहना है कि रात में पेट्रोलिंग टीम तैनात रहती है, लेकिन 200 से 300 की संख्या में आने वाले चोरों का विरोध करने पर वे सुरक्षाकर्मियों पर पथराव और मारपीट कर देते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक ऐसी ही घटना में वह स्वयं भी घायल हुए थे।
वहीं परियोजना के पीओ एके तिवारी ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में आने वाले चोरों के कारण स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि कोयला चोरी पर अंकुश लगाने के लिए अब रात के बजाय दिन में ही कोयले का गिराव कराया जाएगा और क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाएगी।