लातेहार: जिले में विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ओबीसी की जाति आधारित जनगणना, एससी-एसटी-ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन लागू करने तथा वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह आंदोलन देशभर में चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। आंदोलन के पहले चरण में 6 मार्च 2026 को देश के 725 जिलों में ज्ञापन सौंपा गया था। दूसरे चरण के तहत 13 मार्च 2026 को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया। वहीं तीसरे चरण में 23 मार्च 2026 को जिला मुख्यालयों पर रैली आयोजित की जाएगी और चौथे चरण में 23 अप्रैल 2026 को भारत बंद का आह्वान किया गया है।
संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का निर्णय लेने के बावजूद जनगणना अधिसूचना में ओबीसी जातियों का अलग कॉलम शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने इसे ओबीसी समाज के साथ अन्याय बताते हुए आगामी राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी और जाति का कॉलम जोड़े जाने की मांग की।
इसके अलावा ज्ञापन में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन लागू करने तथा वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की भी मांग की गई।
इस दौरान राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा के जिला संयोजक धर्मेंद्र प्रसाद, महिला मोर्चा अध्यक्ष उषा देवी, राष्ट्रीय आदिवासी परिषद के उपाध्यक्ष संतोष उरांव, संजय प्रसाद, अजय प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, लाल जी राम, महेंद्र राम, अजीत उरांव समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। वहीं राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष उरांव, भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता सकेन्द्र उरांव, तरेगन उरांव, रामदयाल उरांव, धर्मेंद्र राम और नेहरू लाल भगत सहित कई लोगों ने आंदोलन को सफल बनाने की बात कही।