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मनरेगा में रॉयल्टी व टैक्स की करोड़ों की कथित गड़बड़ी का आरोप,उपायुक्त से जांच की मांग

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मनरेगा में रॉयल्टी व टैक्स की करोड़ों की कथित गड़बड़ी का आरोप,उपायुक्त से जांच की मांग

लातेहार: मनिका प्रखंड निवासी रमेश पासवान ने मनरेगा योजनाओं में सामग्री आपूर्ति से जुड़े वेंडरों पर रॉयल्टी और टैक्स की कथित करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त कोआवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2013 से 2026 के बीच कई वेंडरों द्वारा मनरेगा योजनाओं…

मनरेगा में रॉयल्टी व टैक्स की करोड़ों की कथित गड़बड़ी का आरोप,उपायुक्त से जांच की मांग
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मनरेगा में रॉयल्टी व टैक्स की करोड़ों की कथित गड़बड़ी का आरोप,उपायुक्त से जांच की मांग

लातेहार: मनिका प्रखंड निवासी रमेश पासवान ने मनरेगा योजनाओं में सामग्री आपूर्ति से जुड़े वेंडरों पर रॉयल्टी और टैक्स की कथित करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त कोआवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2013 से 2026 के बीच कई वेंडरों द्वारा मनरेगा योजनाओं में सामग्री आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान लिया गया, लेकिन सरकार को देय रॉयल्टी और कर जमा नहीं कराया गया।

आवेदन के अनुसार जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) और मनिका प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा जारी पत्रों के आधार पर मेसर्स यादव स्टील, नीरू स्टील, राहुल स्टील, कामद इंटरप्राइजेज सहित कई वेंडरों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन वेंडरों ने भुगतान लेते समय टैक्स जमा करने का शपथ पत्र दिया था, लेकिन बाद में कर जमा नहीं कराया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।

रमेश पासवान ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन वेंडरों को विभाग द्वारा टैक्स चोरी या अनियमितता के कारण ब्लैकलिस्ट किया जाता है, वही लोग कुछ दिनों के भीतर नए जीएसटी नंबर और नई फर्म बनाकर फिर से वेंडर के रूप में काम शुरू कर देते हैं। आवेदन में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि पहले “यादव स्टील” के नाम से काम करने वाली फर्म के ब्लैकलिस्ट होने के बाद “कामद इंटरप्राइजेज” के नाम से दोबारा आपूर्ति का कार्य किया जा रहा है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 25 सितंबर 2021 को जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि वेंडर रॉयल्टी जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सर्टिफिकेट केस किया जाएगा। बावजूद इसके कई वर्षों बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

आवेदक ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी वेंडरों से बकाया रॉयल्टी व कर की वसूली करने, उनके खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज करने तथा संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।

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