लातेहार,स्थानीय धर्मपुर पथ स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के श्री कृष्ण चंद्र गांधी ऑडिटोरियम में रविवार को राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत ‘सप्तशक्ति संगम’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। नारी शक्ति को समर्पित इस कार्यक्रम में महिलाओं की सामाजिक, पारिवारिक एवं राष्ट्रीय भूमिका पर गहन विमर्श हुआ और नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रांत सह संयोजिका कविता जी, मुख्य वक्ता रवि प्रभा जी (चतरा विद्यालय), विद्यालय प्रबंधन से ज्योति चौधरी, मातृ भारती अध्यक्षा रितु रानी जी एवं जिला संयोजिका गीता जी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। मंचासीन अतिथियों का परिचय आचार्या श्रीमती श्वेता जी ने कराया, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना जिला संयोजिका गीता जी ने प्रस्तुत की।
मुख्य वक्ता चतरा जिला सह संयोजिका रवि प्रभा जी ने ‘कुटुंब प्रबोधन एवं व्यक्तित्व विकास’ विषय पर भारतीय दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नारी के भीतर निहित सप्तशक्ति को जागृत करना है, जिससे वह परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में सशक्त भूमिका निभा सके।
प्रांत सह संयोजिका कविता जी ने ‘भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि आधुनिक भारत की प्रगति में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना के माध्यम से नारी शक्ति को आगे बढ़ाने पर बल दिया। वहीं विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति की कोषाध्यक्ष श्रीमती ज्योति चौधरी जी ने अध्यक्षीय संबोधन में नारी सशक्तिकरण के व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान बहनों द्वारा सामूहिक गीत एवं प्रेरणादायी महिलाओं के संदेशों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। विद्यालय की आचार्या मधु कुमारी ने प्रश्नोत्तरी सत्र का सफल संचालन किया। अनुभव कथन के क्रम में अभिभाविका श्रीमती सुजाता जी एवं प्रभा जी ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन आचार्या रजनी नाग जी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन ममता जी द्वारा किया गया, जबकि उपासना कुमारी ने उपस्थित सभी जनों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय द्वारा मातृ शक्ति के आवागमन हेतु बस व्यवस्था, छोटे बच्चों के लिए खेल एवं गतिविधियों की व्यवस्था तथा वात्सल्य कक्ष की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री उत्तम कुमार मुखर्जी सहित अन्य आचार्य एवं दीदी जी की सक्रिय भूमिका रही।