गोमिया (बोकारो)। प्रखंड क्षेत्र में औद्योगिक शोषण, विस्थापन और पलायन के गंभीर मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता संतोष महतो ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ऑनलाइन पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में ‘झुमरा एक्शन प्लान’ की विफलता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
12 न्यायमूर्तियों को भेजा गया पत्र
संतोष महतो ने मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति आनंदा सेन, न्यायमूर्ति राजेश शंकर, न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी, न्यायमूर्ति राजेश कुमार, न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी, न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी, न्यायमूर्ति दीपक रोशन, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय को भी पत्र प्रेषित किया है।
औद्योगिक क्षेत्र, लेकिन विकास से वंचित
पत्र में कहा गया है कि गोमिया प्रखंड की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जिसे कार्यपालिका और विधायिका द्वारा नजरअंदाज किया गया है। क्षेत्र में दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन समेत कई बड़ी कंपनियां और तेनुघाट डैम, कोनार डैम, टीटीपीएस व बीटीपीएस जैसे औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। इसके लिए हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन दशकों बाद भी विस्थापित परिवारों को समुचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार नहीं मिल सका।
स्थानीय युवाओं की उपेक्षा का आरोप
पत्र में आरोप लगाया गया है कि कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। रोजगार के अभाव में क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। वहीं औद्योगिक प्रदूषण से जल, जंगल और जमीन को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे लोगों में गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
‘झुमरा एक्शन प्लान’ पर सवाल
नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए बनाए गए ‘झुमरा एक्शन प्लान’ को लेकर भी पत्र में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संतोष महतो का कहना है कि योजना 15 वर्षों बाद भी धरातल पर नहीं उतरी—न सड़क बनी, न स्कूल और अस्पतालों में सुधार हुआ और न ही रोजगार के अवसर सृजित हुए। करोड़ों रुपये की राशि के उपयोग पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
संतोष महतो ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर स्वतः संज्ञान लिया जाए। साथ ही राज्य सरकार, बोकारो उपायुक्त और संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाए। उन्होंने मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने और योजना की राशि का CAG से ऑडिट कराने की मांग भी की है।
संतोष महतो ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर मौन हैं, तो आम जनता को अब न्यायपालिका से ही न्याय की उम्मीद है।