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बोल बम के जयकारों से गूंजा सतबरवा: कांवरियों का जत्था खामडीह से रवाना

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बोल बम के जयकारों से गूंजा सतबरवा: कांवरियों का जत्था खामडीह से रवाना

रिपोर्ट: दिनेश यादव, सतबरवा से सतबरवा (पलामू)। श्रावण मास के पावन अवसर पर सतबरवा प्रखंड अंतर्गत खामडीह गांव से बोल बम के जयकारों के साथ कांवरियों का एक विशाल जत्था बाबा बैद्यनाथधाम, देवघर के लिए रवाना हुआ। पूरे गांव में भक्तिमय माहौल व्याप्त रहा। ‘बोल बम’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हर कोई…

बोल बम के जयकारों से गूंजा सतबरवा: कांवरियों का जत्था खामडीह से रवाना
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बोल बम के जयकारों से गूंजा सतबरवा: कांवरियों का जत्था खामडीह से रवाना


रिपोर्ट: दिनेश यादव, सतबरवा से

सतबरवा (पलामू)। श्रावण मास के पावन अवसर पर सतबरवा प्रखंड अंतर्गत खामडीह गांव से बोल बम के जयकारों के साथ कांवरियों का एक विशाल जत्था बाबा बैद्यनाथधाम, देवघर के लिए रवाना हुआ। पूरे गांव में भक्तिमय माहौल व्याप्त रहा। ‘बोल बम’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। हर कोई भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया।

कांवर यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा गया। कांवरियों ने बताया कि ‘बोल बम’ का उद्घोष करते हुए शिवधाम की ओर अग्रसर होने से मन और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह यात्रा केवल शारीरिक परिश्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है, जो भक्त को भगवान शिव से जोड़ती है।

बोल बम का आध्यात्मिक रहस्य

‘बम’ शब्द भगवान शिव का एक रहस्यमयी बीज मंत्र है। मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से न केवल सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, बल्कि कठिन यात्रा भी सरल हो जाती है। कांवरिए मानते हैं कि “बोल बम” का जाप शिव कृपा प्राप्त करने का माध्यम है, जिससे कठिनाइयों का सामना सहजता से किया जा सकता है।

पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता

एक पुरानी कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती के आत्मदाह से क्रोधित भगवान शिव ने राजा दक्ष का वध कर दिया था। बाद में उन्हें जीवनदान देकर बकरे का सिर लगाया। तब राजा दक्ष के मुख से पहला शब्द “बम” निकला, जिसे सुनकर भगवान शिव प्रसन्न हुए। तभी से “बोल बम” का जाप शिव आराधना का प्रमुख मंत्र बन गया।

जल चढ़ाने की परंपरा और महत्व

श्रावण मास में कांवरिए गंगा या अन्य पवित्र नदियों से जल भरकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में अर्पित करते हैं। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह जलाभिषेक भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने की भावना से किया जाता है।

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