भक्तों की प्रवेश पर रहेगी रोक, पूजा-अर्चना भी स्थगित
बरहरवा:- प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत गुणहारी पंचायत के मंडई स्थित मां पगली दुर्गा मंदिर और बेगमपुरा स्थित झंमझमिया काली मंदिर के कपाट अंबुबाची पर्व के अवसर पर तीन दिनों तक भक्तों के लिए बंद रहेंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दर्शन पूरी तरह से वर्जित रहेगा।
मां पगली दुर्गा मंदिर के पुरोहित सपन अवस्थी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि अनुसार 22 जून से अंबुबाची योग की शुरुआत होगी। रविवार की सुबह पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 2:57 बजे अंबुबाची का प्रवेश होगा, जिसके बाद मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। यह स्थिति बुधवार 26 जून को तड़के 3:27 बजे तक बनी रहेगी। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त में विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार के साथ मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।
क्या है अंबुबाची पर्व का महत्व
अंबुबाची पर्व को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में मां भगवती रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं, इसलिए उन्हें विश्राम दिया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से असम के नीलांचल पर्वत स्थित विश्व प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर से जुड़ी हुई है, जो 51 शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
मान्यता है कि अंबुबाची के दौरान मां कामाख्या के गर्भगृह के कपाट अपने आप बंद हो जाते हैं। इस अवधि में मंदिर में कोई पूजा या दर्शन नहीं किया जाता। तीन दिन पश्चात रजस्वला की समाप्ति पर चौथे दिन ब्रह्म मुहूर्त में मां को स्नान, श्रृंगार के पश्चात विशेष पूजा कर भक्तों के लिए पट खोला जाता है। इस दिन मां के दर्शन से भक्तों के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।
अंबुबाची मेले का आयोजन विशेष रूप से असम में होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यहां भक्तों को प्रसाद के रूप में गीला वस्त्र दिया जाता है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
इसी परंपरा और श्रद्धा के साथ बरहरवा क्षेत्र के मां पगली दुर्गा मंदिर और झंमझमिया काली मंदिर में भी अंबुबाची पर्व पर मंदिरों के कपाट तीन दिनों तक बंद रखे जाएंगे।