गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र अंतर्गत देवाकी गांव में आदिवासी किसानों के साथ बड़ी ठगी का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 14 जनवरी 2026 को आठ किसानों से पशु तस्करों ने 19 गाय-बैल लेकर फरार हो गए। तस्करों ने दो दिनों में भुगतान का भरोसा दिया था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न तो किसानों को पैसा मिला और न ही उनके मवेशी वापस हुए।
पीड़ित किसान ठंड से लेकर भीषण गर्मी तक तस्करों की तलाश में भटकते रहे। वे खुद सुराग जुटाते हुए सिसई से लोहरदगा के तिगरा गांव तक पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें झूठे आश्वासन ही मिले। तस्कर ने अपना नाम सलमान बताया और गलत पता देकर किसानों को गुमराह किया।
पंचायत समिति सदस्य विजय उरांव के सहयोग से किसानों ने करीब डेढ़ महीने पहले घाघरा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक न प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई है। इससे किसानों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है।
खेती का मौसम नजदीक है, लेकिन मवेशियों के बिना किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। कई किसान अब पलायन करने तक की सोचने लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि जब वे खुद तस्कर तक पहुंच सकते हैं,
थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह का कहना है कि किसानों ने आवेदन तो दिया था, लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराने के बजाय पैसा वापस दिलाने की मांग की थी। हालांकि अब तक राशि नहीं मिलने पर पुलिस आगे की कार्रवाई की बात कर रही है।
यह मामला आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा के विधानसभा क्षेत्र का है, जहां आदिवासी किसानों को ही न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से जल्द मवेशी या उनकी कीमत दिलाने की गुहार लगाई है।
ठगी के शिकार किसानों में सीता उरांव, जतरु उरांव, सतीश उरांव, घुडु उरांव, शंकर उरांव, राम उरांव, महेश बड़ा और बिमला देवी शामिल हैं, जिनसे कुल 19 मवेशी ठगे गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।