गोमिया:- गोमिया प्रखंड के सुदूर सीमावर्ती धवैया एवं कंडेर पंचायत में मनरेगा योजनाओं में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि बीते दो वर्षों से बिना निर्माण कार्य कराए और मजदूरों से बिना काम लिए कागजी प्रक्रिया पूरी कर मजदूरी व सामग्री मद की राशि की लगातार निकासी की जा रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बोकारो जिला सचिव एवं झारखंड आंदोलनकारी इफ्तिखार महमूद ने इस संबंध में उपायुक्त एवं उप विकास आयुक्त, बोकारो को लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कंडेर पंचायत में कूप निर्माण योजना संख्या 7080902718500 (दिनांक 15 अगस्त 2023) के तहत मजदूरी मद में 44,370 रुपये एवं सामग्री मद में 83,800 रुपये का भुगतान एक वर्ष पूर्व ही कर दिया गया, जबकि अब तक निर्माण कार्य शून्य है। आरोप है कि मजदूरों से बिना कार्य कराए मजदूरी मद की राशि का गबन किया गया।
इसी पंचायत में डोभा निर्माण से संबंधित वर्क कोड संख्या 34200017/आईएफ/7080901986873 (15 मार्च 2024 से 15 जून 2024) के तहत प्राक्कलित राशि का पूर्ण भुगतान हो चुका है, लेकिन डोभा का निर्माण नहीं कराया गया है।
धवैया पंचायत में जयपाल महतो की जमीन पर लगभग 15 वर्ष पूर्व सरकारी योजना से कूप का निर्माण किया गया था, जो अब भी मौजूद है। आरोप है कि उसी पुराने कूप को मनरेगा के अंतर्गत नया निर्माण दर्शाते हुए वर्क कोड संख्या 3420005008/आईएफ/7080903812175 के माध्यम से राशि की निकासी की जा रही है। मजदूरी मद में कथित मजदूरों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर गबन करने का भी आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा धवैया पंचायत के कूप निर्माण आईडी संख्या 3420005008/आईएफ/7080904031860 एवं 3420005008/आईएफ/7080903220775 के अंतर्गत भी निर्माण कार्य नहीं हुआ है, जबकि मजदूरी मद की राशि की निकासी जारी है। वहीं कूप निर्माण आईडी संख्या 3420005008/आईएफ/7080902671828 के तहत सुरेश महतो (पिता अकलू महतो) की जमीन पर कूप निर्माण प्रस्तावित है, परंतु चयनित स्थल पर अब तक कोई कार्य नहीं किया गया है।
इफ्तिखार महमूद ने बताया कि इस मामले में उपायुक्त ने पत्रांक 3229 दिनांक 22/12/25 के माध्यम से जिला मनरेगा नोडल पदाधिकारी को तथा उप विकास आयुक्त ने पत्रांक 606 दिनांक 16/12/25 द्वारा जिला पंचायत राज पदाधिकारी को जांच का निर्देश दिया है। बावजूद इसके एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच प्रारंभ नहीं हुई है, जबकि दूसरी ओर योजनाओं से राशि की निकासी लगातार जारी है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में हो रही अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन जांच की प्रक्रिया अत्यंत शिथिल रहने के कारण दोषी बच निकलते हैं। अनियमितताओं के कारण खर्च की गई राशि का वास्तविक उपयोगिता भी सामने नहीं आ पा रही है.