झारखंडस्थानीय समाचार

हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहने की आवश्यकता:हेमंत सोरेन

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मांडर:- हेमंत सोरेन ने राँची
जिला के मांडर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक मुड़मा जतरा के शक्ति स्थल पर पूजा अर्चना कर राज्य की जनता की सुख समृद्धि की किया कामना। राजी पाड़हा मुड़मा जतरा संचालन समिति ने उनके आगमन पर किया उनका पारंपरिक कड़सा नृत्य एवं नृत्य संगीत से शक्ति स्थल से पाड़हा भवन के मुख्य मंच तक स्वागत, कड़सा में दीप प्रज्जवलित कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया दो दिवसीय ऐतिहासिक मुड़मा जतरा का शुभारंभ।

हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहने की आवश्यकता:हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जन कल्याण योजनाओं को बताते हुए कहा कि पाड़हा व्यवस्था हमारे हमें पूर्वजों के समय से चली आ रही है, हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहने की आवश्यकता है। शनिवार को दिन जतरा में जुटेंगे कईराज्य के खोड़हा, जो होंगे आकर्षण के केन्द्र। धर्मगुरु बंधन तिग्गा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा

जतरा का समापन मांडर :- रांची-डलटेनगंज मार्ग पर स्थित मुड़मा मेशाल गांव में लगनेवाले मुड़मा जतरा का आदिवासी समाज में विशेष महत्व है। प्रत्येक वर्ष दशहरा के दसवें दिन यह जतरा आयोजित होता है। इस दिन सरना धर्मगुरु के अगुवाई में 40 के पाहन, पूजार, कोटवार, महतो के द्वारा अधिष्ठात्री शक्ति के प्रतीक जतरा खूंटे की परिक्रमा व जतरा खूंटा की पूजा अर्चना किया गया।

हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहने की आवश्यकता:हेमंत सोरेन

पड़हा झंडे के साथ जतरा स्थल पहुंचे पाहन (पुजारी) ढोल, नगाड़ा, मांदर के थाप अन्य ग्रामीणों के साथ नाचते-गाते आते हैं और मेला स्थल पर पाहन पारंपरिक रूप से सरगुजा के फूल सहित अन्य पूजन सामग्रियों के साथ देवताओं का आहवाहन करते हुए ‘जतरा खूंटा’ का पूजन करता है एवं प्रतीक स्वरूप दीप भी जलाया जाता है।

इस पूजन में सफेद एवं काला मुर्गी की बलि भी चढ़ाई जाती है। इस प्रकार मेला का आरम्भ किया जाता है। मेले मेशामिल लोग , बाघ, घोड़ा, हाथी, मगरमच्छ, नाव, शेर, मछली, तेंगरा, छाता सहित अन्य समुदायिक प्रतिक चिन्हों के साथ आते हैं और गाजे बाजे के साथ घंटों नाचते हैं।

इसके बाद शक्ति स्थल की परिक्रमा भी किया जाता है। सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा के अनुसार यह आदिवासियों का शक्ति पीठ है। मुड़मा गांव उरांव तथा मुंडा आदिवासी समुदायों का मिलन स्थल भी है। इस मेले मे सभी समुदाय के लोग आते हैं और सूख-समृद्धि व शांति की कामना करते हैं।

इस मेले में काफी दूर दराज के लोग आते हैं और जतरा का मजा लेते हैं। सभी तरह की दुकानें, झूला, मौत का कुआँ, सर्कस में भीड़ देखते बन रही है इसके अलावे अन्य सामानों की खूब बिक्री जारी है।

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