महुआडाड़ (लातेहार): क्षेत्र को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2026 के तहत मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) महुआडाड़ के सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. विवेक विद्यार्थी ने की।
कार्यशाला में सीएचसी प्रभारी डॉ. अमित खलखो सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। इस दौरान अभियान को सफल बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई और जिम्मेदारियों का वितरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी की समय पर पहचान कर उसका समुचित इलाज सुनिश्चित करना है, ताकि प्रखंड को पूर्ण रूप से टीबी मुक्त बनाया जा सके।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 22 अप्रैल से 30 अप्रैल तक प्रखंड के चिन्हित हाई-रिस्क गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों के दौरान स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगे, संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। साथ ही टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
कार्यशाला में सीएचओ, बीटीटी और सहिया कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। जिला कार्यक्रम समन्वयक ने शिक्षा विभाग, आपूर्ति विभाग, पंचायती राज विभाग, थाना प्रशासन और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) सहित पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए।
अध्यक्षता कर रहे जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, कर्मियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समय पर जानकारी देकर इलाज सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।
बैठक के अंत में उम्मीद जताई गई कि सामूहिक प्रयास और जागरूकता के माध्यम से महुआडाड़ प्रखंड को जल्द ही टीबी मुक्त बनाया जा सकेगा और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण योगदान देगा।