लातेहार। झारखंड सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “नई दिशा” अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पी.एल.एफ.आई. (पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) के सक्रिय सदस्य एवं एक लाख रुपये के इनामी उग्रवादी आलोक यादव उर्फ चन्द्रशेखर कुमार यादव ने शुक्रवार को लातेहार पुलिस अधीक्षक सभागार में आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान लातेहार के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव, सीआरपीएफ 11 बटालियन के कमांडेंट यादराम सिंह बुनकर, एसएसबी 32 बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह, द्वितीय कमान अधिकारी आर.सी. मिश्रा, डीएसपी अरविंद कुमार सहित पुलिस एवं केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आत्मसमर्पण के समय उग्रवादी आलोक यादव ने एक देसी कट्टा, चार जिंदा कारतूस एवं संगठन से संबंधित वर्दी पुलिस के हवाले की। आलोक यादव लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत बसिया गांव का निवासी है। उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थाना क्षेत्रों में हत्या, 17 सीएलए एक्ट, आर्म्स एक्ट, रंगदारी और धमकी जैसे गंभीर आरोपों में 35 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें रांची जिले में 19, लातेहार में 10 और चतरा जिले में 6 मामले शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, उसके आत्मसमर्पण को पी.एल.एफ.आई. संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आत्मसमर्पण के बाद आलोक यादव ने बताया कि वर्ष 2007 में उसके भाई की हत्या के बाद बदले की भावना में वह उग्रवादी संगठन से जुड़ा था। संगठन में शामिल होने के बाद उसने तेतरियाखांड कोलियरी क्षेत्र और बालूमाथ इलाके में कई गंभीर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया।
आलोक यादव पूर्व में जेएमएमपी/पी.एल.एफ.आई. संगठन से भी जुड़ा रहा है और अब तक तीन बार जेल जा चुका है। वर्ष 2024 में जेल से रिहा होने के बाद वह पुनः पी.एल.एफ.आई. संगठन में शामिल होकर रांची, लातेहार और चतरा जिलों में सक्रिय था।
आत्मसमर्पण के पश्चात पुलिस प्रशासन एवं केंद्रीय बलों के अधिकारियों ने आलोक यादव को गुलदस्ता एवं माला पहनाकर स्वागत किया। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उसे एक लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने कहा कि जिले में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों और सरकार की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा और जंगल का रास्ता केवल विनाश की ओर ले जाता है, जबकि आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना ही बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक विकल्प है।
वहीं सीआरपीएफ के कमांडेंट यादराम सिंह बुनकर ने कहा कि मरने से बेहतर है कि उग्रवादी आत्मसमर्पण कर अपने शेष जीवन को परिवार के साथ शांति और सम्मान से व्यतीत करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय में आत्मसमर्पण ही उग्रवादियों के लिए एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बचा हुआ है।