एजेंसी इनपुट्स के साथ,
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान सिर में गोली लगने से घायल हुए उस्मान हादी की छह दिन बाद गुरुवार रात मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सामने आते ही देश के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं शुरू हो गईं। इस बीच हत्याकांड के मुख्य आरोपी फैसल करीम के भारत भागने का दावा किया गया है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हत्याकांड में आरोपियों को ट्रांसपोर्टेशन में मदद करने वाले सिबियन डियू और संजय चिसिम ने अदालत में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बयान दिया है कि हादी की हत्या का मुख्य आरोपी फैसल करीम घटना के बाद भारत फरार हो गया है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार या भारत की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
बांग्लादेशी सुरक्षाबलों के अनुसार, फैसल करीम हत्या से एक दिन पहले अपनी गर्लफ्रेंड के साथ एक रिजॉर्ट में गया था। वहां उसने कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड से कहा था कि “कल कुछ ऐसा होगा, जिससे पूरा बांग्लादेश हिल जाएगा।” आरोप है कि फैसल ने उस्मान हादी की वीडियो भी उसे दिखाई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी।
उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इसी दौरान एक दिल दहला देने वाली घटना में ढाका के नजदीक भालुका इलाके में एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है।
बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने युवक को बेरहमी से पीटने के बाद नग्न अवस्था में एक पेड़ से लटका दिया और फिर आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि यह घटना गुरुवार रात की है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भीड़ को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिंसा यहीं तक सीमित नहीं रही। गुरुवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख अखबारों—डेली स्टार और प्रोथोम आलो—के कार्यालयों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके अलावा देश के संस्थापक पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान के आवास में भी तोड़फोड़ की गई। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया।
इस बीच, उस्मान हादी का शव शुक्रवार शाम सिंगापुर से ढाका लाया गया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर भेजा गया था, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उस्मान हादी जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और हाल के चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
हादी की हत्या और उसके बाद भड़की हिंसा ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बांग्लादेश की राजनीति को और अस्थिर कर सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजर भी अब बांग्लादेश में हो रही घटनाओं पर टिकी हुई है।